संदेश

गाँधी जयंती पर महात्मा गाँधी के सुविचार

 २ अक्टूबर, भारत देश के लिए बहुत खास है क्योंकि इस दिन भारत के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बापू का जन्म हुआ था। बापू का जन्म २ अक्टूबर १८६९ को गुजरात के तटीय शहर पोरबंदर में हुआ था। बापू का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है। बापू न केवल स्वतंत्रता संग्राम के अहम सूत्रधार थे बल्कि एक कुशल राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक भी थे। गाँधीजी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष योगदान दिया। उनका मूल मंत्र था- शोषण विहीन समाज की स्थापना करना। अतः उसके लिए सभी को शिक्षित होना चाहिए। क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ्य समाज़ का निर्माण असंभव है। उनका मानना था कि मेरे प्रिय भारत के बच्चों को 3H की शिक्षा अर्थात Head, Hand, Heart की शिक्षा दी जाये जो उन्हें स्वावलंबी बनाये। आज जहाँ व्यवसायिक और व्यवहारिक शिक्षा पर जोर दिया जाता है जो देश की एकता में आत्मीयता के अभाव का सबसे बड़ा कारण है। वहीं दूसरी ओर गाँधीजी ने ऐसी शिक्षा पदधति पर जोर दिया जिसमें न केवल मानसिक बल्कि मानसिक, शरीरिक, नैतिक और अध्यात्मिक शिक्षा का पूर्ण रूप से समावेश हो ताकि देश के बच्चे न केवल स्वावलंबी बन पाये बल्कि एक अच्छा इंसान और आत्...

मृत्यु एक जटिल पहेली

मृत्यु एक ऐसा शब्द है जो अनगिनत प्रश्नों को जन्म देता है तथा व्यक्ति को उसके पूरे जीवन काल में अनेकों बार अपनी निश्चित्ता, भयावहता, मृत्यु के बाद की रिक्तता और गहरी शून्यता से सामना कराता है  तब, जब कोई व्यक्ति का प्रिय हमेशा के लिये उसे छोड़कर इस दुनिया से चला जाता है चाहे वे उसका सगा संबंधी हो, प्रिय पशु हो या पक्षी हो इत्यादि। किसी अपने प्रिय की मृत्यु हमेशा पीड़ादायक होती है और यही वजह मनुष्य को हमेशा यह अहसास कराती है कि एक दिन उसे भी इस दुनिया को छोड़कर जाना पड़ेगा। इसलिए मनुष्य के चेतन मन में कभी न कभी यह ही बात चलती रहती है कि मृत्यु का क्या अर्थ है, यह क्यों होती है तथा मृत्यु के बाद इंसान कहाँ जाता हैं? इत्यादि।  मेरे अनुसार " जीवन के अंत का नाम मृत्यु है। "   मृत्यु इस जीवन का कठोर तथा ऐसा विचलित कर देने वाला सत्य है जिसे प्राणी से जुड़े उसके सगे संबंधियों को ऐक्षिक व् अनेक्षिक रूप से इसे स्वीकार करना ही पड़ता है। जिसने भी इस नश्वर संसार में जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और यह जीवन का अटल सत्य है। यह सत्य इतना भयावह है कि जिसके बारे में सोच...

बच्चों के जीवन में दादा दादी/नाना नानी का महत्व

जीवन में माता पिता के अलावा बच्चों का एक सच्चा, पवित्र और चुम्बकीय संबंध जो होता है वह किसी और से नहीं अपने दादा - दादी व अपने नाना - नानी से होता है तथा उनके व्यक्तित्व के विकास मैं उनके दादा दादी की अहम् भूमिका होती है| Joyce Allston ने लिखा है " दादा- दादी, नायक की तरह बच्चे के विकास के लिए विटामिन के रूप में आवश्यक हैं|" दादा दादी अपने घर के वो मजबूत स्तंभ होते हैं जिनकी वजह से घर के संस्कार, मूल्य व परिवार की एकता टिकी रहती है तथा जिनकी छत्र छाया में न केवल माँ बाप बल्कि नाती पोते भी अपने आपको सुरक्षित पाते हैं। उनके उचित संस्कारों, अनुभवों और सही गलत के मायनों को सीख कर व उनका अनुसरण करते हुए एक मजबूत और सफल इंसान बन पाते हैं। या यह कह सकते हैं कि दादा- दादी उस किताब की भाँति हैं जो साल दर साल बीतने पर अपनी चमक खोती तो जाती है पर उसमें लिखी विषय सामग्री इतनी मजबूत ,प्रभावशाली और जीवंत होती है कि हर उस पड़ने वाले का मार्गदर्शन करती है जो उसे पड़ना ,सीखना व उसका अनुसरण करना चाहते हैं।  दादा- दादी चाहे कितने भी बुजुर्ग और कमजोर हो जाये पर उनके अनुभव और सीख बच्चों को कठिन स...

शिक्षक दिवस की महत्वता

आप सभी को ५ सितंबर शिक्षक दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं | जैसा कि आप सभी जानते हैं कि शिक्षक दिवस भारत के महान शिक्षाविद, दर्शनशास्त्री और भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्ण की जयंती के मौके पर १९६२ से हर वर्ष ५ सितंबर को मनाया जाता है| शिक्षक एक ऐसी शक्सियत है जो सिर्फ शिक्षा ही नहीं पूरी दुनियाँ को समझदारी और सही गलत का अंतर बताता है,और जिसके बिना जीवन काफी संघर्ष पूर्ण हो जाता है, यह शिक्षक विद्यालय में पड़ाने वाला गुरु तो होता ही है साथ ही में यह शिक्षक कोई अपना जैसे मां बाप, भाई- बहन, दादा- दादी और कोई भी हो सकता है जिसे हम सुनना पसंद करते हैं और जिनका हम अनुसरण करना चाहते हैं| जीवन में हर इंसान को अपनी भिन्न भिन्न राहों पर इन सबकी शिक्षा, सहयोग और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ती है लेकिन आज शिक्षक दिवस से तात्पर्य उन शिक्षकों से है जो अपने शिष्यों को अपने ज्ञान, अनुभवों व वर्तमान परिस्तिथियों से अवगत कराते हुए उनके चेतन मन के कोरे कागज पर कुछ ऐसे अक्षर अंकित करते हैं जिनको शिष्य आत्मसात करके अपने पैरों पर खडा हो पाता है और सही रूप में ज्ञान अर्जन के बाद धन अर्जन के क...

जन्माष्टमी उत्सव की बधाई

मेरे सभी प्रियजनों को कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई | यह पर्व है उल्लास का, अनुष्ठान का और भगवान श्री कृष्ण के बताये आदर्शों को याद करके उन पर मनन करने का और उनके बताये मार्ग पर चलने का | जन्माष्टमी एक ऐसी मोहरात्रि है जिसमें भगवान कृष्ण के ध्यान, नाम और मंत्र जपने से समस्त प्राणियों की संसार से आसक्ति हटती है और वह कृष्णमय होकर एक अलौकिक आनंद की अनुभूति करते हैं क्योंकि आनंद और प्रेम का साक्षात स्वरूप प्रभु श्री कृष्ण हैं तभी तो उन्हें परमानंद भी कहा जाता है और ये आनंद और प्रेम संसार के समस्त प्राणियों के अंदर निहित है, इस प्रकार जब जब जन्माष्टमी आती है तब तब कृष्ण को मानने वाले और उस अनंत सत्ता में विश्वास रखने वाले उसी आनंद का अनुभव करते हैं जो कृष्ण को अनुभूत करने पर होती है | समस्त प्राणीजन उनके जन्मोत्सव पर आनंदमय हो जाते हैं और उनकी समस्त लीलाओं का ध्यान करके उनका पूजन व भजन कीर्तन करते हैं, उपवास रखते हैं, अनेक झांकियां सजाते हैं और अपने आप को सौभाग्यशाली समझते हैं| इसका एक कारण यह भी है कि "जब एक शरीर प्राण धारण करता है तभी उसी समय आनंद की भी उत्पत्ति होती है|" ...

राम मंदिर का शिलान्यास

मेरे सभी बड़े, छोटों व हमारे प्रभु श्री राम में आस्था रखने वाले समस्त मित्रों को ५ अगस्त को होने जा रहे राम मंदिर के शिलान्यास की बहुत बहुत बधाई। ये दिन है उत्सव का, उल्लास का और अपने प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था व्यक्त करने का। आज हम अपने आपको सौभाग्यशाली मानते हैं कि हम उस पीढ़ी के लोग हैं जो राम मंदिर के निर्माण के साक्षी बनेंगे जिसका सपना इन बीते हुए ५०० वर्षों में असंख्य रामभक्तों ने संजोया था और ये सपना आज हकीकत में तब्दील होने जा रहा है। अयोध्या दुल्हन की तरह सज रही है, अयोध्या का हर कोना कोना, हर पत्ता पत्ता राम के नाम से गुंजायमान हो रहा है मानो श्रीराम विजय रथ पर सवार होकर अयोध्या की और आ रहे हो और नगर वासी उनके आने की खुशी में भाव विभोर होकर नगर को सजा रहे हों। ये बहुत ही अद्भुत दृश्य है जो भगवान श्री राम के प्रति भक्तों की गहरी आस्था को व्यक्त करता है। इस दिन हम सब जो अयोध्या नहीं जा सकते अपने घर में ही रहते हुए पांच, दस जितने भी हो सके दीपक जलायें और न केवल अपने प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करे बल्कि उन समस्त वीर रामभक्तों को श्रधांजलि भी दे जिन्होंने इस द...

कारगिल युद्ध के वीर जवानों(कविता)

ओ भारत माता के तुम वीर जवानों,  कारगिल युद्ध के तुम तीर कमानों।  तुमने भारत माता की लाज बचाई,  सीने पर अपने जब गोलियाँ खाईं।  धरा रक्त से लाल हुई तब,  साँसों में गूंजी बस मातृभूमि की शपथ।  अंतिम साँस तक लड़े तुम वीरों,  पर धीर न खोया तुमने रणधीरों।  दुश्मन दल का किया डट कर सामना,  उनको भी सूझा न बचने का कोई ठिकाना।  घुटने टेकने पर मजबूर हुआ तब,  भारत की ओर आँख उठाने वाला।  टाइगर हिल पर तिरंगा फहराकर,  तुम्हारे शौर्य से देश हर्षाया।  अपनी शहादत की गाथा लिखकर,  मातृभूमि का तुमने मान बढ़ाया।  कारगिल दिवस तुम्ही से शुशोभित,  दर्शाता है तुम्हारा अधम्य योगदान।  तुमने जीत की शिला रखी भारत में,  शहादत के लिखे गये तुम पैग़ाम।  कोटि कोटि नमन है ऐसे वीरों को,  जो देश की शान बढ़ाते हैं।  अपने प्राण न्यौछावर करके,  एक सच्चे योद्धा कहलाते हैं।  प्रेषक - दीप्ति सोनी