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Mother's Day (कविता)

मेरी कलम से,  मां की क्या मैं परिभाषा दूँ,  मां तो केवल मां होती है | जीवन की हर राह दिखाये ,  वो ही तो सच्ची गुरू होती है l  कटता ज़िसका हर पल पल,  बच्चों की फरमाइशों मैं,  कभीं ना रुकती, कभी ना थकती,  घर का वह स्तंभ होती है | कोई ना इसके समक्ष ठहरता,  निस्वार्थ प्यार -भाव और करूणा मैं,  वो तो समुद्र सा अस्तित्व रखती ,  अपने प्यार  और दुलार मैं | धैर्य की है वो प्रतीमूरत ,  बच्चों की है वो, शीतल छाया  ऐस छाया के आँचल मैं,  बच्चों का घर संसार समाया| मां की महिमा के आगे,  सब वेद पुराण नतमस्तक हैं | ज़िसके चरणों मैं बसता स्वर्ग है,  बाकी के वैभव फीके हैं | मां के गुणों की क्या तारीफ करूँ,  ज़िसमें हर ऋतुओं के स्वाद समाये हैं| ऐसे चरणों को करती हूँ वंदन,  ज़िसके कारण हम इस दुनिया मैं आये हैं| बना रहे सदा आशिर्वाद तुमहारा मां  हर सुख - दुख के साये मैं| कभी ना रुकूँ, कभी ना डरु  इस जीवन की मझधार मैं| प्रेषक - दीप्ति सोनी