संदेश

(सत्य एक अंसुलझी पहेली पर लेख) लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सत्य एक अंसुलझी पहेली

चित्र
कहते हैं "सत्य से मुठभेड़ किये बगेर आप अपने आप को कभी पा नहीं सकते हैं।" तो क्या है ये सत्य, ये सवाल न जाने कितने बुद्धिजीवियों के मन में उथल पुथल मचाता है और नयी परिभाषाओं को जन्म देता है। ऐसी अनेक परिभाषाओं में से, मैं भी सत्य की परिभाषा को अपनी कलम का रूप देना चाहूँगी।  "सत्य वे है जिसे हम अपनी पहली साँस से अंतिम हिचकी तक जीते है। उससे प्यार करते हैं और अपने खिलाफ कोई सच बोले तो हम उससे नफ़रत भी करते हैं और अपनी पोल खुल जाने के डर से भयभीत भी होते हैं पर दूसरों के गोपनीय रहस्य को जानने के लिए हमेशा बेताब रहते हैं।"  यही वजह है कि आज कल लोग गूगल सर्च करते हैं, यूट्यूब देखते हैं, किताबें पड़ते हैं और सत्य जानने के लिये ज्योतिषियों के चक्कर लगाते हैं। वैसे सत्य एक जटिल शब्द है। सत्य का स्वभाव ऐसा है कि ये कभी कभी इंसान को विचलित कर देता है तो उसे उस समय सत्य को हजम कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन एक सच ये भी है कि इस सत्य को अंत में स्वीकार भी करना पड़ता है। अगर ऐसा नहीं होता तो हम मृत्यु को स्वीकार ही न कर पाते। कई बार हमारे मन में एक असुरक्षा क...