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बचपन एक सुंदर अहसास (कविता)

बचपन एक सुंदर अहसास और एक ऐसी अवस्था है जो अनेक रंगों से भरी हुई होती है| जहाँ माँ बाप, दादा दादी, बड़े छोटों का स्नेह न केवल उस बचपन को सुरक्षा व गति देता है वरन उस बचपन को अनेक संस्कारों से पोषित भी करता है| मौज़ मस्ती, पड़ना- लिखना, खेलना- कूदना, खेल- खेल में अनेक चीजों को सीखना, अपनी जिद मनवाना, नई नई चीजों की फरमाइश करना इत्यादि| यह सब बचपन के वो खुबसूरत पल हैं जो व्यक्ति को बड़े होने पर बार बार बचपन की यादों में ले जाते हैं और ये कहने पर मजबूर करते है कि काश वे बचपन के दिन दोबारा लोट आयें या काश मैं उन लम्हों को दोबारा जी सकता इत्यादि| बचपन वो अल्हड़ अवस्था है जिसमें लाख गलत कार्य करने पर मां बाप की थोड़ी सी नाराज़गी, डांट व मार खाने के बाद भी  बच्चे अपने मां बाप और प्रियजनों से लिपटे रहते हैं क्योंकि इस अवस्था में उनका अहं उस स्तर का विकसित नहीं हो पाता है जिसकी वजह से बच्चे अपने मां बाप, दादा दादी, बहन भाई से बात करना छोड़ दे, उनसे नाता तोड़ दें| तभी अक्सर प्रौणा अवस्था में पहुँचते ही यह कहते हुए सुना जाता है कि अगर जिंदगी खुशहाल बितानी है तो बच्चों से सीखो क्योंकि बच्चे मन...