साँसों का संघर्ष (कविता)
साँसों का संघर्ष अभी जारी है, मौत जिंदगी पर सदैव भारी है। हर जगह अफरा तफरी है मची, यह समय बड़ा ही विस्मयकारी है। घूम रहे अचंभित लोग यहाँ वहाँ, हो रही साँसों की सौदेबाजी से। कहीं इंसानियत बिक चुकी तो, कहीं इंसानियत पर धर्म की पहरेदारी है। आँसू है, गम है, पीड़ा है अपार, इस नाउम्मीदी भरे माहौल में। दानव और मानव के इस युद्ध में, चमत्कार की भोर अभी बाकी है। प्रेषक- दीप्ति सोनी