स्वतंत्रता दिवस का जश्न पर कविता
१५ अगस्त १९४७ का दिन, यह जश्न है उस आज़ादी का। जो मिली भारत को सैकड़ों प्रयासों से, जब बजा बिगुल क्रांतिकारियों का। जन जन में आक्रोश भरा था, ब्रिटिश हुकूमत की जंजीरों से। पर मन में विश्वास अडिग था, मुक्त होना है हमें इन जंजीरों से | चाहें हिंसा हो या फिर अहिंसा, | हर मार्ग को हम अपनायेगे | अपनी भारत की माटी से, इन फिरंगियों को मार भगायेंगे | यही देशप्रेम का जज्बा लेकर, जब कूदे स्वतंत्रता के संग्राम में | न कोड़े देखे, न सलाखें देखी, चढ़ गए फांसी के तख्ते पर | हर रोम रोम में, हर साँस साँस में, उनके बस, इंकलाब की आग थी | अपनी मातृभूमि से प्यारी मां जैसी, तब कोई मां न, उनके पास थी | ऐसे विचारों के चलते जब, भारत में तिरंगा फहराया गया | देशप्रेम की सच्ची गाथाओं ने, १५ अगस्त १९४७ को इतिहास रचाया | नमन है ऐसी देशभक्ति पर, जिनके चलते हमने स्वतंत्रता पाई | स्वतंत्रता दिवस के ७९ वें जश्न पर, पूरे देश को स्वतंत्रता दिवस की बधाई | प्रेषक - दीप्ति सोनी