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योग का अर्थ और उसका महत्व

योग का अर्थ "  योग एक ऐसी गूढ़ साधना और प्रक्रिया है जो शारीरिक,मानसिक और आध्यात्मिक रूप से पूरे शरीर को एकाग्रचित् होकर जोड़ने का प्रयास करती है। अर्थात योग का अर्थ है जोड़ना या जुड़ना।" अब प्रश्न यह उठता है कि योग की उत्पति किसने की और इसके संस्थापक कौन हैं।  योग के संस्थापक आदियोगी शिव को माना गया है। जो न केवल एक आलौकिक साधना में लीन रहते है। बल्कि उनकी नृत्य की शैली में भी एक विशिष्ट योग मुद्रा की झलक देखने को मिलती है। आज से लाखों वर्ष पूर्व मनुष्य अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित करके और योग साधना में लीन होकर अपने शरीर की आत्मा को परमात्मा से इस तरह से जोड़ लेते थे कि उस पर किसी बाहरी पदार्थ का असर नहीं होता था। तब यह ही योग हजारों वर्षों की तपस्या कहलाता था। परंतु आज वर्तमान समय में योग की विचारधारा में बदलाव आया है और इस विचारधारा में बदलाव लाया आज से २०० ईसा पूर्व योग सूत्र के रचयिता महर्षि पतंजलि ने जिन्होंने योग को नई दिशा दी। पतंजलि ने योग के १९५ सूत्रों को प्रतिपादित किया है पतंजलि ही पहले और एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने योग को आस्था, अंधविश्वास और धर्म से बाहर ...