सावन का श्रृंगार भोले
बारह ज्योतिर्लिंग तुमसे सुशोभित, इस धरा के तुम पालनहार हो। है ओंकारेश्वर, है महाकालेश्वर, सावन का तुम ही श्रृंगार हो। सावन के प्रथम सोमवार में, महादेव आपका स्वागत है। सच्चे मन से जो कोई तुम्हें पूजे, उसका हो जाता भव से बेड़ा पार है। ये सावन भी अधूरा सा लागे जब, बम बम भोले का नाद न सुने। आक, धतूरा और भाँग चढ़ाकर, जब तक भोले तुम्हारा गुणगान न करें। है कैलाशी, है गंगाधर, सब भक्तों की फरियाद तुम सुनना। सावन की इन मीठी-मीठी फुआरों में, जनमानस का कल्याण तुम करना। प्रेषक- दीप्ति सोनी