होली एक अनूठा पर्व
इस धरती पर हर धर्म के अपने- अपने त्योहार हैं जो मनाये जाते हैं पर हमारे हिंदु धर्म का एक विशेष और अनोखा त्योहार है जिसे हम सब होली के नाम से जानते हैं। यह त्योहार न केवल मनाया जाता है वरन् खेला भी जाता है और इस रंग बिरंगे खेल को खेलना सिखाया आज से पाँच हजार वर्ष पूर्व द्वापर युग के अवतारी पुरुष भगवान कृष्ण ने जिसने न केवल राधा और गोपियों के साथ भिन्न भिन्न रंगों से होली खेली अपितु एक ऐसे पर्व की नीँव रखी जिसे आज भी हिंदु धर्म में विश्वास रखने वाले बड़े हर्षोउल्लास से मनाते और खेलते हुए आ रहे हैं। निश्चित् रुप से यह पर्व है रंगों का तथा हर रंग अपने आप में इतना खूबसूरत और अर्थपूर्ण है जो आपस में मिलकर न केवल हर व्यक्ति व आसपास की फ़िज़ा को अपने रंगों से सराबोर कर देता है वरन इतना अनूठा बना देता है कि हम सब इन रंगों में भीगकर उतने ही खूबसूरत लगने लगते हैं जितनी सुंदर हमारी प्रकृति है। यह कहना गलत न होगा यह होली पर्व हमें प्रकृति के निकट ले जाता है, खुले आसमान के नीचे घरों से बाहर निकलकर , शिशु से लेकर वृद्ध अवस्था के हर व्यक्ति को एक पल के लिये एक ही अवस्था का बना कर के उस उन्मुक्त, अल्हड...