खोली गई मधुशालाएं
आज ऐसा कया हुआ जो, सड़कों पर हलचल मच गई लाॅकडाउन का पालन करती सडकें, आज फिर लम्बी कतारों से सज गई | मंदिर, मस्जिद खुल न सके, जब खोली गई मधुशालाएं, सैलाब उमड़ कर जा पहुँचा वहाँ, ताक पर रख सबकी जानें | अर्थ व्यवस्था का उल्हाना देने वालों, कयो नासमझी करते हो, अपने निजी स्वार्थ के लिए नये आदेश गणते हो | तरस आता है ऐसे लोगों पर, जिनका कोई सरोकार नहीं, वतन को खतरे में डालना, इससे बड़ा कोई पाप नहीं |