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जून 7, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आलसपन बड़ा दु:खदाई (कविता)

आलसपन है बड़ा दु:खदायी,  छोड़ो इसको मेरे भाई।  करने देता नहीं कोई काम,  इसके रहते सब बिगड़े काम।  न ही इसका कोई ठौर ठिकाना,  बस पूरे दिन आराम फरमाना।  बुद्धि को ये है हर लेता,  आगे नहीं ये भड़ने देता।  आलस है, निष्क्रियता का सूचक,  है सूचक, असफलता का भी ।  जो कोई इसकी शरण में जाता,  वो खोता सब कुछ अपना ही।  आओ हम सब प्रण करें,  आलस कभी करेगें नहीँ।  दिमाग को सक्रिय बनाकर ही,  काटेगें आलसपन की नींव।                (दीप्ति सोनी) 

स्वादिष्ट और उपयोगी केला (कविता)

केला हम सब का एक बेहद प्रिय फल होता है क्योंकि ये जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही शरीर के लिए गुणकारी भी होता है तथा इसके पत्ते भी काफी बड़े होते हैं जो न केवल भोजन करने के काम आते हैं बल्कि इन पत्तों में भिन्न भिन्न प्रकार के पकवान भी बनाये जाते हैं तथा इनके पत्तों का उपयोग खाना खाने के लिए भी होता है। भारत के कई स्थानों पर केले के पेड़ की पूजा भी की जाती है। इस प्रकार केला न केवल हमारे शरीर के लिए वरन हमारे दैनिक जीवन का भी अभिन्न अंग है।  इस प्रकार मैंने छोटे बच्चों के लिए केले पर एक कविता लिखी है ताकि वह केले की उपयोगिता के बारे में ज्यादा से ज्यादा समझ सकें और उसे अपनी कक्षा में प्रस्तुत कर सकें।  ऊपर से मैं पीला पीला,  अंदर से मैं हूँ सफेद।  चुस्ती लाये, फुर्ती लाये,  मेरा है ये गुण विशेष।  सारे फल होते गोल गोल,  पर मेरा आकार लंबा है।  जो कोई मुझको हर रोज खाता,  होता स्वास्थ्य, उसका अच्छा है।  हर पत्ता भी मेरा पूजनीय,  जो सारे पत्तों का सरताज है।  जो कोई करता इसमें भोजन,  वो करता प्रकृति का आभार है।  ऐसे अद्भुत ...

तिरंगा झंडा(कविता)

मैं स्वतंत्र भारत का प्रतीक,  तिरंगा कहलाता मेरा नाम | तीन रंगों से सजा हुआ,  बढ़ाता हूँ भारत की शान | केसरिया रंग मेरा मुकुट,  साहस, बलिदान का जो है प्रतीक | शौर्य की ये गाथा बतलाता,  प्रेरित करता इसका अस्तित्व | चौबीस तीलियों से सजा हुआ,  मैं धर्म चक्र कहलाता हूँ | सफेद रंग में सुसोभित होकर,  सत्य और शांति का पाठ पड़ाता हूँ | हरा रंग मेरा सबसे प्यारा,  जो है समृद्धि का प्रतीक | इसमें रच बस कर ही,  पोषित होता अखंडता का दीप |              (दीप्ति सोनी) 

चमकीले तारे (कविता)

रात्रि का श्रृंगार हूँ मैं,  जब आसमान में चमकता हूँ | टिम टिम टिम टिम करता रहता,  सबका मन मोह लेता हूँ | अनगिनत असंख्य मेरी सीमा,  अनगिनत नामों से सजा हुआ | ब्रमांड मैं है मेरा अस्तित्व,  लड़ियों सा मैं वहाँ बिखरा हुआ | चंदा का सैनिक बनकर जब मैं,  रात्रि में चहुंओर बिखर जाता हूँ | फैलाकर अपनी सफेद चाँदनी,  रात्रि को रोशन कर जाता हूँ |              (दीप्ति सोनी) 

बादल की महिमा (कविता)

मैं बादल मैं बादल,  सबसे न्यारा मैं बादल | आसमान मैं बसता हूँ,  धीरे-धीरे मैं चलता हूँ | एक नहीं स्थान मेरा,  पूरा अंबर विस्तार मेरा | जहाँ भी चाहूँ चल देता हूँ,  अपनी धुन में  ही रहता हूँ |                            मैं बादल मैं बादल............  पानी भी बरसाता हूँ,  जब काले रूप में आता हूँ | उमड़ घुमड़ कर आकर मैं,  बिजली भी चमकाता हूँ |                             मैं बादल मैं बादल.............  पृथ्वी को छाया देता मैं,  जब सूरज को ढक लेता हूँ | मैं हूँ मस्त पवन का साथी,  हर पल चलता रहता हूँ |                                          (दीप्ति सोनी) 

विश्व पर्यावरण दिवस

पांच तत्वों से बना शरीर,  पांच तत्वों में ही पर्यावरण समाया | करें सुरक्षा इस पर्यावरण की,  इसमें जीवों का संसार समाया | हर दिन लगाएँ सैकड़ों पेड़,  न काटें इनको, अनावश्यक हम  हरा भरा रखकर इस धरा को, आओ पर्यावरण को बचाएं हम |                (दीप्ति सोनी)