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हमारा भारतवर्ष (कविता)

हम भारत के वासी हैं,  ये पावन भूमि हमारी है।  इसकी माँटी की खुशबू की,  कुछ बात ही निराली है।  उत्तर में खडा हिमालय,  भारत का पहरेदार है।  जड़ी-बूटियों,औषधियों का दाता,  यह भारत का श्रृंगार है।  इसकी छटा है निराली,  जो प्राणों से भी प्यारी है।  इससे निकलती नदियों की,  कुछ बात ही निराली है।  मंदिर, मज्जित, गिरिजाघरों से सुशोभित्,  भारत ने बनायी अलग पहचान है।  ये कर्म भूमि है, ये धर्म भूमि है,  भारतियों का ये अभिमान है।  है कण-कण भारत का पूजनीय,  जिसने धर्म का मार्ग सिखलाया है।  भिन्न भिन्न जीवनशैली में बंटकर भी,  हमको एकता का पाठ पढ़ाया है।  ऐसे अतुल्य भारत की छवि में,  आओ कहीं खो जाएँ हम।  महसूस करें इसकी माँटी की खुशबू,  इस देश का मान बढ़ाये हम।  आओ तिरंगा फहराये हम || भारत माता की जय जय हिन्द जय भारत🇮🇳   प्रेषक- दीप्ति सोनी