संदेश

नमन तुम्हें हो सोनू सूद

विस्मित् करती तस्वीरें जब दिखीं न्यूज़ चैनल और अखबारों पर,  लेकिन निकल कर न आया कोई मजदूरों की बदहाली पर ।  सत्ता के गलियारों मैं सबने जब,  एक दूसरे पर आरोप लगाया था।  तब बालीवुड का एक नवयुवा,                                     मजदूरों👨‍👩‍👧‍👧 का मसीहा बनकर सामने आया था।  ना ही उछाली किसी और पर कीचड़,  न ही किया निरादर किसी का,  जो बन पड़ा उसके हाथों से,  करता जा रहा बेखौफ खडा।  हर संकट की घड़ी में जब,                                   कोई भी साथ निभाता है ऐसे जज्बे को सलाम करता हरकोई,  गुणगान उसी के ही गाता है।  ऐसी महामारी में जब सभी,  कोरोना वारियर्स का अभिनंदन कर रहे हैं,  कभी कर रहे फूलों की बर्षा🌺🌺,  कभी एकता के दीप जला रहे हैं।  एक आभार इस शख्स का भी करदो,  जो खडा हुआ है सीना ताने,  मजदूरों को उनके घर पहुँच व...

कोरोना से जंग

खौफ के साये में है दुनिया,  चारों ओर अंधकार समाया है।  इस पृथ्वी पर मानो जैसे,  एक राक्षस उतर कर आया है।  मूक युद्ध कर रहा हर कोई इससे,  कुछ और जी लेने की चाहत में।  लाखों को निगल रहा यह हर दिन,  बेखौफ होकर इस संसार में।  तराजू में तोल कर रखदी इसने,  संपन्न और मजबूत देशों की शक्ति।  फैलाके जाल अपना इस संसार में,  कमर तोड़ के रख दी सबकी।  आशायें टूटती जा रही हैं सबकी,  बेबसी का आलम छाया है।  निरप्राध् मरते जा रहे लोगों को,  कोई कंधा देने भी न आ पाया है।  बदल चुकी है सबकी जीवनशैली,  काम, काज और व्यवहार में।  समाज की सामाजिकता भी छीन ली इसने,  अपने भय के बाजार में।  भुखमरी का आलम छा रहा,  हर शहर और राज्य में।  मेहनत कश आदमी भी मर रहा,  अब रोजगार के अभाव में।  न ही दिख रही कोई कश्ती,  न ही दिख रहा कोई किनारा।  जल्द ही इस राक्षस का नाश हो,  कोरोना मुक्त हो ये संसार हमारा।।                घर पर रहें और सुरक्षित रहें।।😷 ...

मजदूरों का पलायन 😢

मजदूर चले पलायन की य़ात्रा,  नहीं मिला कोई संगी सहारा | भूखे पेट कर रहे, लम्बी य़ात्रा ,  बस चलते जा रहे अपनी य़ात्रा | सर पर सामान व बच्चों को थामे,  बेबसी के मारे , वो लाचारे | आँखो में आँसू , मन मैं चुभन,  डगमगा रही है मानो, जीवन की डगर | ना जेब मैं पैसे, ना सर पे छत ,  समय ने दिखाया ये बेदर्दी का सच | थमी सी ज़िन्दगी को पलायन से चला रहे हैं,  कुछ हो रहे चोटिल तो कुछ बेमौत मारे जा रहे हैं | ऐसा दृश्य देखकर मन बार बार यही पूछता है , हर मजदूर वर्ग का क्या ये ही हश्र होता है ?😢

खोली गई मधुशालाएं

आज ऐसा कया हुआ जो,  सड़कों पर हलचल मच गई लाॅकडाउन का पालन करती सडकें,  आज फिर लम्बी कतारों से सज गई | मंदिर, मस्जिद खुल न सके,  जब खोली गई मधुशालाएं,  सैलाब उमड़ कर जा पहुँचा वहाँ,  ताक पर रख सबकी जानें | अर्थ व्यवस्था का उल्हाना देने वालों,  कयो नासमझी करते हो,  अपने निजी स्वार्थ के लिए नये आदेश गणते हो | तरस आता है ऐसे लोगों पर,  जिनका कोई सरोकार नहीं,  वतन को खतरे में डालना,  इससे बड़ा कोई पाप नहीं |

Mother's Day (कविता)

मेरी कलम से,  मां की क्या मैं परिभाषा दूँ,  मां तो केवल मां होती है | जीवन की हर राह दिखाये ,  वो ही तो सच्ची गुरू होती है l  कटता ज़िसका हर पल पल,  बच्चों की फरमाइशों मैं,  कभीं ना रुकती, कभी ना थकती,  घर का वह स्तंभ होती है | कोई ना इसके समक्ष ठहरता,  निस्वार्थ प्यार -भाव और करूणा मैं,  वो तो समुद्र सा अस्तित्व रखती ,  अपने प्यार  और दुलार मैं | धैर्य की है वो प्रतीमूरत ,  बच्चों की है वो, शीतल छाया  ऐस छाया के आँचल मैं,  बच्चों का घर संसार समाया| मां की महिमा के आगे,  सब वेद पुराण नतमस्तक हैं | ज़िसके चरणों मैं बसता स्वर्ग है,  बाकी के वैभव फीके हैं | मां के गुणों की क्या तारीफ करूँ,  ज़िसमें हर ऋतुओं के स्वाद समाये हैं| ऐसे चरणों को करती हूँ वंदन,  ज़िसके कारण हम इस दुनिया मैं आये हैं| बना रहे सदा आशिर्वाद तुमहारा मां  हर सुख - दुख के साये मैं| कभी ना रुकूँ, कभी ना डरु  इस जीवन की मझधार मैं| प्रेषक - दीप्ति सोनी

akshya tratiya

Holi nikal gayi, navratri nikal gayi, Aur aa gayi akshya teej Bihari tere charan darshan na kar paaye,  Ye kaisi hai tere bhaktajanon ki takdeer Vrindavan ki kunj galiyan mai jab,  Hoti thi tere bakton ki bheed Un galiyon ko aaj sunsaan dekhkar,  Mere man mein chubhte bebasi ke teer Bihariji ab to kholo pat tumhare,  Ye ankhiyan tumhare darshan ki pyasi hai Jald ubaro is corona mahamari se,  Jo manav par pad rahi bhari hai Tum na ubaroge to kon ubare,  Tum hi jag ke palanhare ho Baktjanon ke dukh harne wale,  Kahlate banke bihari ho Kahlate banke bihari ho Bolo banke bihari lal ki jai