खोली गई मधुशालाएं
आज ऐसा कया हुआ जो,
सड़कों पर हलचल मच गई
लाॅकडाउन का पालन करती सडकें,
आज फिर लम्बी कतारों से सज गई |
मंदिर, मस्जिद खुल न सके,
जब खोली गई मधुशालाएं,
सैलाब उमड़ कर जा पहुँचा वहाँ,
ताक पर रख सबकी जानें |
अर्थ व्यवस्था का उल्हाना देने वालों,
कयो नासमझी करते हो,
अपने निजी स्वार्थ के लिए
नये आदेश गणते हो |
तरस आता है ऐसे लोगों पर,
जिनका कोई सरोकार नहीं,
वतन को खतरे में डालना,
इससे बड़ा कोई पाप नहीं |
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