मजदूरों का पलायन 😢
मजदूर चले पलायन की य़ात्रा,
नहीं मिला कोई संगी सहारा |
भूखे पेट कर रहे, लम्बी य़ात्रा ,
बस चलते जा रहे अपनी य़ात्रा |
सर पर सामान व बच्चों को थामे,
बेबसी के मारे , वो लाचारे |
आँखो में आँसू , मन मैं चुभन,
डगमगा रही है मानो, जीवन की डगर |
ना जेब मैं पैसे, ना सर पे छत ,
समय ने दिखाया ये बेदर्दी का सच |
थमी सी ज़िन्दगी को पलायन से चला रहे हैं,
कुछ हो रहे चोटिल तो कुछ बेमौत मारे जा रहे हैं |
ऐसा दृश्य देखकर मन बार बार यही पूछता है ,
हर मजदूर वर्ग का क्या ये ही हश्र होता है ?😢
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