संदेश

राजू श्रीवास्तव को भावभीनी श्रद्धांजलि

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कह कर दुनिया को अलविदा,  गजोधर भैया यूँ जल्दी चले गये।  कहलाते थे वो कोमेडी के बादशाह,  आज सबको उदास यूँ छोड़ गये।  याद आती है आज उनकी, वो हास्य प्रस्तुतियाँ,  जो सच में सबको आनंदित करने वाली थीं।  हर वाक्य में झलकती, वो कानपुर की शैली,  जो सबको पल भर में गुदगुदाने वाली थी।  वो शख्स दिखते, बहुत साधारण से थे,  पर उनकी शख्सियत बहुत निराली थी।  मंच पर पहुँचते ही चेहरे पर सबके,  एक हँसी की लहर ले आने वाली थी।  आज मंच है पर नहीं हो आप राजू भैया,  जो फिर से हम सबको बहुत हँसाओगे।  जब जब जिक्र होगा कामेडी का दिल से,  आप सच में सबको बहुत याद आओगे।  आप सच में सबको बहुत याद आओगे।  प्रेषक - दीप्ति सोनी

अनुभव का अर्थ और उसकी महत्वता

जीवन में अक्सर हम अनुभवों से जुड़ी बातें कहते या सुनते हैं या फिर कभी कभी अपने अनुभव दूसरों से समय समय पर साझा करते हैं। तो क्या है इस अनुभव का अर्थ और उसकी महत्वता। इस बात पर थोड़ा प्रकाश डालने की आवश्यकता है।  मेरे अनुसार " किसी कार्य व व्यवहार को निरंतर प्रयोग करते रहने व उस कार्य और व्यवहार की परीक्षा के परिणाम स्वरूप प्राप्त ज्ञान को अनुभव  कहते हैं। " अनुभव किसी भी इंसान के जीवन की अमूल्य निधि होते हैं। जिनके बल पर एक इंसान अपनी जिंदगी में आगे बढ़ता चला जाता है और समाज में अपनी एक नई छवि बनाने में सक्षम हो पाता है। अतः यह कहना गलत न होगा कि अनुभव ही एक व्यक्ति के व्यक्तित्व को किसी दूसरे व्यक्ति के व्यक्तित्व से अलग करते हैं। जीवन में चाहे धन, मित्र, रिश्तेदार, और समाज व्यक्ति के काम आये न आये परन्तु अच्छा और बुरा अनुभव ही इंसान की जिंदगी में हमेशा काम में आता है। अनुभव इंसान का वो रथ है जिसका सारथी स्वंय मनुष्य है और जिसके साथ एक मनुष्य बहुत कुछ हाँसिल कर सकता है और जीवन में अच्छे ,बुरे का भेद भी समझ पाता  है। अनुभव ही प्रगति व समाज को जोड़ने का कार्य करत...

पापा पर कविता

मेरे पापा मेरी पहचान,  मेरे लिए हैं वो भगवान।  जिस दिन पापा नाराज हो जाते,  फीकी पड़ जाती मेरी मुस्कान।  नन्ही सी मुझे गोद में खिलाया,  अंगुलियाँ पकड़कर मुझे चलना सिखाया।  पापा की हूँ मैं प्यारी बेटी,  हर दिन मुझको कुछ अच्छा सिखाया।  सुबह स्कूल उनका, मुझे छोड़ने जाना,  स्कूल से मेरा फिर घर वापस आना।  फोन करके पूछते ऑफिस से,  बिटिया तुम आ गयी जरा बताना।  हर चीज़ का वो मेरा ध्यान रखते,  मेरे लिए हर दिन सोचते रहते।  शिक्षित होकर काबिल बन जाऊँ,  इसलिए दिन रात वो मेहनत करते।  शनिवार, इतवार होते मेरे लिए खास,  जब मैं जाती घूमने पापा के साथ।  नयी नयी फरमाइश करती पापा से,  नखडे दिखाती मैं उनको हजार।  भगवान से मेरी अब यही प्रार्थना,  मेरे पापा को देना खुशियाँ हज़ार।  स्वस्थ, सुखी रखना हरदिन उनको,  कभी न करना उनको उदास।  (दीप्ति सोनी)  दूसरी कविता पिता बच्चों की मुस्कान हैं,  पिता बच्चों का अभिमान हैं।  पिता के साये में रहकर ही,  बच्चों की खुशियाँ आबाद हैं।...

सत्य एक अंसुलझी पहेली

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कहते हैं "सत्य से मुठभेड़ किये बगेर आप अपने आप को कभी पा नहीं सकते हैं।" तो क्या है ये सत्य, ये सवाल न जाने कितने बुद्धिजीवियों के मन में उथल पुथल मचाता है और नयी परिभाषाओं को जन्म देता है। ऐसी अनेक परिभाषाओं में से, मैं भी सत्य की परिभाषा को अपनी कलम का रूप देना चाहूँगी।  "सत्य वे है जिसे हम अपनी पहली साँस से अंतिम हिचकी तक जीते है। उससे प्यार करते हैं और अपने खिलाफ कोई सच बोले तो हम उससे नफ़रत भी करते हैं और अपनी पोल खुल जाने के डर से भयभीत भी होते हैं पर दूसरों के गोपनीय रहस्य को जानने के लिए हमेशा बेताब रहते हैं।"  यही वजह है कि आज कल लोग गूगल सर्च करते हैं, यूट्यूब देखते हैं, किताबें पड़ते हैं और सत्य जानने के लिये ज्योतिषियों के चक्कर लगाते हैं। वैसे सत्य एक जटिल शब्द है। सत्य का स्वभाव ऐसा है कि ये कभी कभी इंसान को विचलित कर देता है तो उसे उस समय सत्य को हजम कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन एक सच ये भी है कि इस सत्य को अंत में स्वीकार भी करना पड़ता है। अगर ऐसा नहीं होता तो हम मृत्यु को स्वीकार ही न कर पाते। कई बार हमारे मन में एक असुरक्षा क...

सावन का श्रृंगार भोले

बारह ज्योतिर्लिंग तुमसे सुशोभित,  इस धरा के तुम पालनहार हो।  है ओंकारेश्वर, है महाकालेश्वर,  सावन का तुम ही श्रृंगार हो।  सावन के प्रथम सोमवार में,  महादेव आपका स्वागत है।  सच्चे मन से जो कोई तुम्हें पूजे,  उसका हो जाता भव से बेड़ा पार है।  ये सावन भी अधूरा सा लागे जब,  बम बम भोले का नाद न सुने।  आक, धतूरा और भाँग चढ़ाकर,  जब तक भोले तुम्हारा गुणगान न करें।  है कैलाशी, है गंगाधर,  सब भक्तों की फरियाद तुम सुनना।  सावन की इन मीठी-मीठी फुआरों में,  जनमानस का कल्याण तुम करना।  प्रेषक- दीप्ति सोनी

हिन्दी दिवस पर कविता

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नदी की धारा के समान चंचल भाषा,  वो प्यारी भाषा हमारी हिन्दी है।  हर प्रान्त की मिठास को समाहित किये,  वो न्यारी भाषा हमारी हिन्दी है।  हर अक्षर है इसका अद्भुत,  जो हर शब्द को खास बनाता है।  स्वरों की चादर में लिपटकर,  हर वाक्य को अर्थपूर्ण बनाता है।  भावनाओं के सागर में बहकर जब,  कोई शब्द जुबान पर आता है।  तब कोई लेखक हो या वक्ता,  अपने मर्म को समझा पाता है।  उस मर्म की गहराइयों को सहजता से,  अभिव्यक्त कराती हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी है।  भारत देश की शान है जो भाषा,  वो भाषा हमारी हिन्दी है।  वो भाषा हमारी हिन्दी है।  प्रेषक - दीप्ति सोनी

विचारों की शक्ति

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  हम हर दिन कभी न कभी अपनी बातों में  सामान्यता यह कहता हुआ पाते हैं कि आज हमारे मन में ये विचार आया या मेरे विचार से यह होना चाहिए इत्यादि इत्यादि। तब प्रश्न यह उठता है की यह विचार होते क्या हैं तथा किसी कार्य को करने में इनकी क्या भूमिका होती है।  हमारे दिमाग में हर क्षण अनेको सकारात्मक और नकारात्मक विचार आते हैं। इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि विचारों के संग्रह का नाम ही विचार होता है और इन विचारों को संग्रह करने वाला विचारक कहलायेगा। विचार एक ऐसी क्षमता और शक्ति है जो भगवान् ने हम मनुष्यों को इतनी प्रभावशाली तरीके से दी है ताकि हम मनुष्य अपने जीवन में  हर रोज आने वाली समस्याओं का तुरंत समाधान कर पाए। चाहे वो समस्याएँ आंतरिक हो या बाहरी। बशर्ते मनुष्य विचारों को क्रियान्वयन करने के लिए जागरूक हो, चिंतनशील हो और चेतना में हो। सोये हुए व्यक्ति के दिमाग में कितने भी विचार आयें और जायें ,उससे कोई समस्या का समाधान नहीं हो सकता। विचार उन बादलों की तरह हैं जो कभी रुकते नहीं और नदी में तैरती हुई उस नाँव की तरह हैं जिसके तैरने से नदी की गहराइ...