विचारों की शक्ति
हम हर दिन कभी न कभी अपनी बातों में सामान्यता यह कहता हुआ पाते हैं कि आज हमारे मन में ये विचार आया या मेरे विचार से यह होना चाहिए इत्यादि इत्यादि। तब प्रश्न यह उठता है की यह विचार होते क्या हैं तथा किसी कार्य को करने में इनकी क्या भूमिका होती है।
हमारे दिमाग में हर क्षण अनेको सकारात्मक और नकारात्मक विचार आते हैं। इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि विचारों के संग्रह का नाम ही विचार होता है और इन विचारों को संग्रह करने वाला विचारक कहलायेगा। विचार एक ऐसी क्षमता और शक्ति है जो भगवान् ने हम मनुष्यों को इतनी प्रभावशाली तरीके से दी है ताकि हम मनुष्य अपने जीवन में हर रोज आने वाली समस्याओं का तुरंत समाधान कर पाए। चाहे वो समस्याएँ आंतरिक हो या बाहरी। बशर्ते मनुष्य विचारों को क्रियान्वयन करने के लिए जागरूक हो, चिंतनशील हो और चेतना में हो। सोये हुए व्यक्ति के दिमाग में कितने भी विचार आयें और जायें ,उससे कोई समस्या का समाधान नहीं हो सकता। विचार उन बादलों की तरह हैं जो कभी रुकते नहीं और नदी में तैरती हुई उस नाँव की तरह हैं जिसके तैरने से नदी की गहराइयों पर कोई असर नहीं पड़ता है। विचार हमारे दिमाग व् आत्मा की वो उपज है जिसका हमारे पूरे शरीर से कोई लेना देना नहीं है और उनके आने और जाने से पूरे शरीर के किसी भी अंग पर कोई फर्क भी नहीं पड़ता है, फर्क तब पड़ता है जब इन विचारों के साथ भावनाओं का सागर जुड़ जाता है। तब ये विचार भावयुक्त विचार बनकर इतने शक्तिशाली हो जाते हैं जो जीवन में हम मनुष्यों से ऐसा करवाने की ताकत रखते हैं जिससे मनुष्य अपने आप को दूसरों से अलग करके देख पाता है।
आज के बढ़ते शोशल मिडिया के दौर में हर कोई अपनी -अपनी रूचि, ज्ञान और अनुभव के आधार पर अपने भाव युक्त विचारों को न केवल लिखित तौर पर या बोलकर फेस बुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व् वाट्सएप्प पर प्रेषित करता हुआ पाया जाता है बल्कि उन विचारों को अपनी रूचि के अनुसार आत्मसात करके साझा करने का भी प्रयास करता हैं। परन्तु इन विचारों मे कितनी वास्तविक्ता है और ये कितने सकारात्मक हैं ये सब हमारी जागरूकता ,चेतना ,समझ और ज्ञान पर निर्भर करता है.आज के बदलते हुए हालातों में हम विचारों की शक्ति की प्रबलता को बहुत गहराई से देख सकते हैं भावयुक्त विचारों की शक्ति एक ऐसी शक्ति है जो पूरे राष्ट्र को जहाँ एकजुट जोड़ सकती है और विरोधी भावयुक्त विचारों का आलिंगन करके पूरे राष्ट्र में अशांति उपद्रव ,मारकाट ,व् हत्या का बीज भी बो सकती है।आज के समय में कोई व्यक्ति कितना भी ज्ञानी ,अनुभवी ,और सक्षम क्यों न हो उसके विचार तब तक किसी राष्ट्र को अखंड नहीं बना सकते जब तब उसके विचारों में अपनापन ,सत्यता और ईमानदारी का भाव न हो।
अभी हाल ही में हम सभी ने बड़े हर्षोउल्लास से आजादी के ७५ वर्ष पूरे होने की ख़ुशी में आजादी का अमृत महोत्सव इसी १५ अगस्त को बड़ी धूम धाम से मनाया था। यह प्रमाण है उन समान विचारों का जिसने इस उत्सव को सकारात्मक रूप से संपन्न करवाया और यह भी याद दिलाया कि किस तरीके से ऊँच -नीच ,अमीर - गरीब,धर्म -जाति का भेद न करके हमारे स्वंत्रता सैनानियों ने विरोधी विचारों की ताकत को कुचलकर अपने एकजुट और सकारात्मक विचारों की अखंडता से १५ अगस्त को अपने देश को आजाद करवाया था। आज हमारे भारत देश को फिर से जरुरत है उन विरोधी विचारों की ताकत को ध्वस्त करने का जो हमारे देश की अखंडता को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं और फिर से उन विचारों की अखंडता की नींव रखने का जिसकी आज हमारे देश को बहुत जरुरत है। कौन से विचार सकारात्मक है या नकारात्मक ,किनका चुनाव करे और किनका बहिष्कार करे। इसके लिए हमें अपनी दर्ष्टि नहीं दृष्टि कोण बदलना पड़ेगा और टटोलना होगा अपने अंतर्मन को ,अपनी समझ को, अपने इतिहास और धर्मग्रंथों के पन्नों को और विश्लेषण करना होगा देश में घट रही घटनाओं को समझने का।तभी हम सभी अपने विचारों की शक्ति का पूरे विश्व के समक्ष एक सच्चा प्रमाण दे पायेंगे तथा इसकी शुरुआत हम सभी को अपने -अपने परिवार से ही करनी चाहिए क्योंकि परिवार किसी भी समाज की पहली इकाई है तथा विचार संस्कारों का दर्पण है जो परिवार से ही पोषित होते हैं।
अतः यह कहना अनुचित न होगा कि आज हम तकनिकी युग में ही नहीं अपितु विचारों की दुनिया में अपनी सांस ले रहे है।
लेखिका - दीप्ति सोनी
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