राजू श्रीवास्तव को भावभीनी श्रद्धांजलि

कह कर दुनिया को अलविदा, 
गजोधर भैया यूँ जल्दी चले गये। 
कहलाते थे वो कोमेडी के बादशाह, 
आज सबको उदास यूँ छोड़ गये। 

याद आती है आज उनकी, वो हास्य प्रस्तुतियाँ, 
जो सच में सबको आनंदित करने वाली थीं। 
हर वाक्य में झलकती, वो कानपुर की शैली, 
जो सबको पल भर में गुदगुदाने वाली थी। 

वो शख्स दिखते, बहुत साधारण से थे, 
पर उनकी शख्सियत बहुत निराली थी। 
मंच पर पहुँचते ही चेहरे पर सबके, 
एक हँसी की लहर ले आने वाली थी। 

आज मंच है पर नहीं हो आप राजू भैया, 
जो फिर से हम सबको बहुत हँसाओगे। 
जब जब जिक्र होगा कामेडी का दिल से, 
आप सच में सबको बहुत याद आओगे। 
आप सच में सबको बहुत याद आओगे। 

प्रेषक - दीप्ति सोनी

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