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होली एक अनूठा पर्व

इस धरती पर हर धर्म के अपने- अपने त्योहार हैं जो मनाये जाते हैं पर हमारे हिंदु धर्म का एक विशेष और अनोखा त्योहार है जिसे हम सब होली के नाम से जानते हैं। यह त्योहार न केवल मनाया जाता है वरन् खेला भी जाता है और इस रंग बिरंगे खेल को खेलना सिखाया आज से पाँच हजार वर्ष पूर्व द्वापर युग के अवतारी पुरुष भगवान कृष्ण ने जिसने न केवल राधा और गोपियों के साथ भिन्न भिन्न रंगों से होली खेली अपितु एक ऐसे पर्व की नीँव रखी जिसे आज भी हिंदु धर्म में विश्वास रखने वाले बड़े हर्षोउल्लास से मनाते और खेलते हुए आ रहे हैं। निश्चित् रुप से यह पर्व है रंगों का तथा हर रंग अपने आप में इतना खूबसूरत और अर्थपूर्ण है जो आपस में मिलकर न केवल हर व्यक्ति व आसपास की फ़िज़ा को अपने रंगों से सराबोर कर देता है वरन इतना अनूठा बना देता है कि हम सब इन रंगों में भीगकर उतने ही खूबसूरत लगने लगते हैं जितनी सुंदर हमारी प्रकृति है। यह कहना गलत न होगा यह होली पर्व हमें प्रकृति के निकट ले जाता है, खुले आसमान के नीचे घरों से बाहर निकलकर , शिशु से लेकर वृद्ध अवस्था के हर व्यक्ति को एक पल के लिये एक ही अवस्था का बना कर के उस उन्मुक्त, अल्हड...

प्रकृति है जीवन का गहना (कविता)

प्रकृति है जीवन का गहना,  इसकी सुंदरता का क्या कहना | मनमोहक हरियाली सी चादर ओढ़े,  अदभुत छटा बिखेरे इसका हर कोना | पशु, पक्षी, मानव और जलचर,  पोषित होते इसके आँचल में | नदियाँ, सागर, पर्वत और झरने,  शोभित होते इसके आँगन में | सुबह - शाम का आना जाना,  प्रकृति का है ये सुगम तराना | रात लंबी काली सी चादर ओढ़े,  भोर में चिड़ियों का फिर गुनगुनाना | है अदभुत, अनोखा प्रकृति का हर दृश्य,  जो कराता हमें एक सुंदर एहसास | ये एहसास हमेशा सुंदर बना रहे,  ऐसा करते रहें हम हरदम प्रयास | एक पौधा अवश्य लगाये, प्रकृति की सुंदरता को बचायें।  लेखिका - दीप्ति सोनी

नारी शक्ति की महिमा

जैसा कि नवरात्र के महत्व को हम सभी जानते हैं कि नवरात्रों में माँ जगत जननी दुर्गा की नौ रूपों में उपासना की जाती है। माँ दुर्गा उस शक्ति का नाम है जिसका जन्म ही राक्षसी ताकतों का विनाश करने के लिए तथा समस्त प्राणियों की शक्ति बनकर उनकी हर विपदाओं का निवारण करने के लिये हुआ है। ऐसी शक्ति जो इस श्रष्टि के विकास का मूल आधार है तथा जिसे संपूर्ण जगत धरती ,पृथ्वी, प्रकृति ,भूमि ,नारी ,गाय ,नदियाँ, अग्नि ,साधना ,उपासना , अन्नपूर्णा ,भोर, साँझ, रात्रि इत्यादि नामों से जानता है जिसके गर्भ में सृष्टि के विस्तार का अमूल्य खजाना छिपा हुआ है | जिसने अपनी अष्ट भुजाओं से श्रष्टि का कार्यभार सम्हाला हुआ है| जिसके अंदर करुणा ,दया ,ममता और अनेक भावनाओं का सागर समाहित है परन्तु ये शक्ति इतनी शक्तिशाली होते हुए भी आदिशक्ति कहलाती है जैसे माता पार्वती भगवान् शंकर की आदिशक्ति कहलाती हैं | तथा वह अपने स्वामी भोले नाथ की न केवल  उपासना करती हैं बल्कि उनकी आज्ञा अनुसार दैत्यों का संघार भी करती हैं | हिन्दू धर्म के मुताबिक ब्रह्मा जी , भगवान् विष्णु ,और भगवान् शंकर उन्हीं की शक...

भक्ति और प्रेम में अंतर

मानव जीवन को सुखमय और आनंदमय बनाने में प्रेम और भक्ति का विशेष योगदान रहा है तथा किसी भी परिस्थिति में इन दोनों के बिना जीवन अधूरा है | तो क्या ये दोनों शब्द एक हैं या अलग | इसको समझना अति आवश्यक है |  भक्ति कि परिभाषा    मेरे अनुसार "भक्ति उस सेवा भाव का नाम है जिसमे पवित्र, निश्छल प्रेम और अटूट श्रद्धा का वास होता है अर्थात प्रेम और श्रद्धा के योग को भक्ति कहते हैं | " जब व्यक्ति अपने जीवन में किसी अन्य व्यक्ति ,ईश्वर , निर्जीव वस्तु तथा स्थान के प्रति अपना निस्वार्थ प्रेम, विशवास और अटूट श्रद्धा रखता है वहाँ सहसा ही भक्ति की अविरल धारा बहती है | जैसे कि मनुष्य ने ईश्वर को कभी नहीं देखा है परन्तु वह अपनी साँसों में , वायु में व्  इस पृथ्वी के हर कण कण में उस सूक्ष्म परन्तु विराट शक्ति को महसूस करता है तथा अपने अपने धर्म के अनुसार अपने इष्ट का पूजन, भजन व् ध्यान करता है , उसका हर पल स्मरण करता है तथा जो भी वह मन ,वचन और कर्म से उसके लिए कर सकता है वो सदैव करने का प्रयास भी करता रहता है और अपने आपको सौभाग्यशाली समझता है | यह भक्ति शब्द अपने आप में...

गाँधी जयंती पर महात्मा गाँधी के सुविचार

 २ अक्टूबर, भारत देश के लिए बहुत खास है क्योंकि इस दिन भारत के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बापू का जन्म हुआ था। बापू का जन्म २ अक्टूबर १८६९ को गुजरात के तटीय शहर पोरबंदर में हुआ था। बापू का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है। बापू न केवल स्वतंत्रता संग्राम के अहम सूत्रधार थे बल्कि एक कुशल राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक भी थे। गाँधीजी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष योगदान दिया। उनका मूल मंत्र था- शोषण विहीन समाज की स्थापना करना। अतः उसके लिए सभी को शिक्षित होना चाहिए। क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ्य समाज़ का निर्माण असंभव है। उनका मानना था कि मेरे प्रिय भारत के बच्चों को 3H की शिक्षा अर्थात Head, Hand, Heart की शिक्षा दी जाये जो उन्हें स्वावलंबी बनाये। आज जहाँ व्यवसायिक और व्यवहारिक शिक्षा पर जोर दिया जाता है जो देश की एकता में आत्मीयता के अभाव का सबसे बड़ा कारण है। वहीं दूसरी ओर गाँधीजी ने ऐसी शिक्षा पदधति पर जोर दिया जिसमें न केवल मानसिक बल्कि मानसिक, शरीरिक, नैतिक और अध्यात्मिक शिक्षा का पूर्ण रूप से समावेश हो ताकि देश के बच्चे न केवल स्वावलंबी बन पाये बल्कि एक अच्छा इंसान और आत्...

मृत्यु एक जटिल पहेली

मृत्यु एक ऐसा शब्द है जो अनगिनत प्रश्नों को जन्म देता है तथा व्यक्ति को उसके पूरे जीवन काल में अनेकों बार अपनी निश्चित्ता, भयावहता, मृत्यु के बाद की रिक्तता और गहरी शून्यता से सामना कराता है  तब, जब कोई व्यक्ति का प्रिय हमेशा के लिये उसे छोड़कर इस दुनिया से चला जाता है चाहे वे उसका सगा संबंधी हो, प्रिय पशु हो या पक्षी हो इत्यादि। किसी अपने प्रिय की मृत्यु हमेशा पीड़ादायक होती है और यही वजह मनुष्य को हमेशा यह अहसास कराती है कि एक दिन उसे भी इस दुनिया को छोड़कर जाना पड़ेगा। इसलिए मनुष्य के चेतन मन में कभी न कभी यह ही बात चलती रहती है कि मृत्यु का क्या अर्थ है, यह क्यों होती है तथा मृत्यु के बाद इंसान कहाँ जाता हैं? इत्यादि।  मेरे अनुसार " जीवन के अंत का नाम मृत्यु है। "   मृत्यु इस जीवन का कठोर तथा ऐसा विचलित कर देने वाला सत्य है जिसे प्राणी से जुड़े उसके सगे संबंधियों को ऐक्षिक व् अनेक्षिक रूप से इसे स्वीकार करना ही पड़ता है। जिसने भी इस नश्वर संसार में जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और यह जीवन का अटल सत्य है। यह सत्य इतना भयावह है कि जिसके बारे में सोच...

बच्चों के जीवन में दादा दादी/नाना नानी का महत्व

जीवन में माता पिता के अलावा बच्चों का एक सच्चा, पवित्र और चुम्बकीय संबंध जो होता है वह किसी और से नहीं अपने दादा - दादी व अपने नाना - नानी से होता है तथा उनके व्यक्तित्व के विकास मैं उनके दादा दादी की अहम् भूमिका होती है| Joyce Allston ने लिखा है " दादा- दादी, नायक की तरह बच्चे के विकास के लिए विटामिन के रूप में आवश्यक हैं|" दादा दादी अपने घर के वो मजबूत स्तंभ होते हैं जिनकी वजह से घर के संस्कार, मूल्य व परिवार की एकता टिकी रहती है तथा जिनकी छत्र छाया में न केवल माँ बाप बल्कि नाती पोते भी अपने आपको सुरक्षित पाते हैं। उनके उचित संस्कारों, अनुभवों और सही गलत के मायनों को सीख कर व उनका अनुसरण करते हुए एक मजबूत और सफल इंसान बन पाते हैं। या यह कह सकते हैं कि दादा- दादी उस किताब की भाँति हैं जो साल दर साल बीतने पर अपनी चमक खोती तो जाती है पर उसमें लिखी विषय सामग्री इतनी मजबूत ,प्रभावशाली और जीवंत होती है कि हर उस पड़ने वाले का मार्गदर्शन करती है जो उसे पड़ना ,सीखना व उसका अनुसरण करना चाहते हैं।  दादा- दादी चाहे कितने भी बुजुर्ग और कमजोर हो जाये पर उनके अनुभव और सीख बच्चों को कठिन स...