प्रकृति है जीवन का गहना (कविता)
प्रकृति है जीवन का गहना, इसकी सुंदरता का क्या कहना | मनमोहक हरियाली सी चादर ओढ़े, अदभुत छटा बिखेरे इसका हर कोना | पशु, पक्षी, मानव और जलचर, पोषित होते इसके आँचल में | नदियाँ, सागर, पर्वत और झरने, शोभित होते इसके आँगन में | सुबह - शाम का आना जाना, प्रकृति का है ये सुगम तराना | रात लंबी काली सी चादर ओढ़े, भोर में चिड़ियों का फिर गुनगुनाना | है अदभुत, अनोखा प्रकृति का हर दृश्य, जो कराता हमें एक सुंदर एहसास | ये एहसास हमेशा सुंदर बना रहे, ऐसा करते रहें हम हरदम प्रयास | एक पौधा अवश्य लगाये, प्रकृति की सुंदरता को बचायें। लेखिका - दीप्ति सोनी