संदेश

आयुर्वेद का वरदान कोरोनिल (कविता)

जब संजीवनी बूटी ने दिया था,  लक्ष्मन जी को नया जीवन दान।  फिर क्यों माँग रहे हो बाबा रामदेव से,  कोरोनिल दवाई का तुम लोग प्रमाण।  ये भी है एक जड़ीबूटियों का मिश्रण,  फिर क्यों कर रहे हो इसका अपमान।  प्रमाण माँगने के चक्कर में पड़कर,  मरीज गवां रहे है हर दिन, अपनी जान।  वैसे तो रोज डाक्टर बता रहे,  काडा पियो दिन में तीन बार।  इम्युनिटी बढ़ाने के नुस्खे छिपे हैं,  आपकी घर की रसोई में हजार।  समझ नहीं आता है मुझको,  क्या सच में हम भारतवासी हैं।  जो जपते रहते एकता की माला,  पर दिल से कितने विरोधाभासी हैं।  आज यदि कोई पहल कर रहा,  इस धरा को इस संकट से बचाने में।  उपहास उडाया जा रहा उस व्यक्ति का,  जिसने आयुर्वेद को पहचान दिलाई,  अपने योग के माध्यम से।  सोचो समझो चेतना में आओ,  आयुर्वेद हमारी संस्कृति है।  इसके कण कण में छिपी है,  अनेक रोगों से लड़ने की शक्ति है।  यदि कोरोनिल सफल हो गयी  तो सोचो उस वक्त क्या होगा।  अमन शांति फैलेगी दुनिया में,  आयुर्वेद नम...

योग एक सुंदर साधना (कविता)

प्रकृति का संचार है योग,  मन को वश में करता योग।  योग की साधना पर चल कर,  शरीर हो जाता बिल्कुल निरोग।  गरीब,अमीर में भेद न करता,  करता प्रेरित इसका उपयोग,।  है कठिन मगर असंभव नहीं,  अपनाते इसे हर आयु के लोग।    योग है एक सुंदर साधना,  स्वाँस और मन के एकाग्रिता की।  प्रकाशित करती तन की काया,  एक तरंग उठती जब चेतना की।  आओ इस योग दिवस पर,  कुछ योग आसन अपनायें।  सुप्तावास्ता मैं पड़ी काया को,  फिर से ऊर्जावान बनायें।  (दीप्ति सोनी)  The nature of the communication is yoga,  Tame the mind does yoga.  Yoga of silence on the walk,  The body is absolutely healthy.  The poor,rich in distinguish does not,  Does the Apostle use it,.  Is hard but not impossible,  By adopting it, every age of people.  Yoga is a beautiful spiritual practice,  Class and mind with ecogra's.  Publishes the tan of physique,  A waveform sparkles when of consciousness.  Come...

खुशियाँ हमारी बड़ी अनोखी (कविता)

खुशियाँ हमारी बड़ी अनोखी,  अलग अलग रूप में आतीं।  कभी होठों पर, कभी दिलों में,  सुख की दस्तक दे जातीं।  जब होती खुशियों की बारिश,  जीवन उमंग से भर जाता।  कभी इधर तो कभी उधर,  खूशियों से आँगन भर जाता।  अपनों के लिए,कभी दूसरों के लिए,  कुछ करके जो मिलती है खुशी।  क्या बतलाऊँ उस पल दिल में,  बिछ जाती है सुकून की लडी।  खुशियाँ बड़ी हो या फिर छोटी,  यह सोचने की बात नहीं।  हर पल जीलो इन खुशियों को,  इससे बड़ी कोई सौगात नहीं।         (दीप्ति सोनी) 

रंग बिरंगी तितलियाँ (कविता)

फूल से भी हल्की, रंग बिरंगी इधर उधर उड़ती हैं तितलियाँ।  उनका रूप मनमोहक इतना,  लुभाता सबको बनाके अपना।  सुंदर प्रकृति की सुंदरता पाकर,  इठलाती हैं जब ये तितलियाँ।  उंगलियों पर भी रंग छोड़ जातीं,  जब पकड़ने जाओ इनकी पंखुड़ियाँ।  हर फूल फूल पर जब भी वो,  जाती हैं उड़ उड़ कर बैठ।  फूल भी मुस्काते धीरे धीरे,  उनकी चंचलता को देख।  बच्चे करते आँख मिचोली,  जब उनकी सुंदरता को देख।  पाँव दवाकर जब पकड़ने जाते,  तितलियाँ उड़ जाती उनको देख।  (दीप्ति सोनी) मैं तितली मैं तितली,  रंग बिरंगी मैं तितली।  सबके मन को भाती हूँ,  जब उड़ उड़ के इठलाती हूँ।  छोटा है आकार मेरा,  चंचलता व्यवहार मेरा।  जो कोई मेरे पास आता,  उसका मन मुझे पकड़ना चाहता।  फूलों का अभिमान हूँ मैं,  उपवन की पहचान हूँ मैं।  मैं हूँ हल्की फुल्की जान,  चाहता मुझको हर इंसान।  (दीप्ति सोनी) 

कोरोना बनाम प्रकृति (कविता)

बहुत दिन हो गये, बाहर देखे हुए,  अपनों को भीड़ में खोते हुए।  समय ने बदल दी रफ्तार हमारी,  कोरोना ले गया आजादी हमारी।  जब महत्वकांक्षि मानस ने,  प्रकृति के सुगम तारों को छेड़ा था।  अपनी माँ का सुख- शांति,  चैन भी, उससे छीना था।  क्योँ भूल गए की ये प्रकृति माँ है हमारी,  गर नाराज हो गयी तो कहर ढायेगी भारी।  अपनी आज़ादी पाने के लिए,  जब छीनेगी आज़ादी हमारी।  दे जायेगी एक प्रबल संदेश जो रहेगा सदा जनहित में जारी।  प्रकृति की गोद में बैठे हो,  सदा उसका आदर करो।  करो उसकी हर इक चीज से प्यार,  कभी उसका निरादर न करो।  जीवन और मृत्यु के बीच की कड़ी को,  सदा परअहिंसा, धर्म, सात्विकता और श्रेष्ठ भावनाओं के साथ जियो।  प्रकृति कितनी सुंदर है, सदा इसका आभास करो,  यह घातक विध्वंश दोबारा न देखना पड़े,  ऐसा तुम प्रयास करो।  सात्विकता को जीवन में अपनाकर, इस महामारी का नाश करो।  जियो और जीने दो की इस पंक्ति को,  फिर से एक बार चरितार्थ करो।  (दीप्ति सोनी) 

आलसपन बड़ा दु:खदाई (कविता)

आलसपन है बड़ा दु:खदायी,  छोड़ो इसको मेरे भाई।  करने देता नहीं कोई काम,  इसके रहते सब बिगड़े काम।  न ही इसका कोई ठौर ठिकाना,  बस पूरे दिन आराम फरमाना।  बुद्धि को ये है हर लेता,  आगे नहीं ये भड़ने देता।  आलस है, निष्क्रियता का सूचक,  है सूचक, असफलता का भी ।  जो कोई इसकी शरण में जाता,  वो खोता सब कुछ अपना ही।  आओ हम सब प्रण करें,  आलस कभी करेगें नहीँ।  दिमाग को सक्रिय बनाकर ही,  काटेगें आलसपन की नींव।                (दीप्ति सोनी) 

स्वादिष्ट और उपयोगी केला (कविता)

केला हम सब का एक बेहद प्रिय फल होता है क्योंकि ये जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही शरीर के लिए गुणकारी भी होता है तथा इसके पत्ते भी काफी बड़े होते हैं जो न केवल भोजन करने के काम आते हैं बल्कि इन पत्तों में भिन्न भिन्न प्रकार के पकवान भी बनाये जाते हैं तथा इनके पत्तों का उपयोग खाना खाने के लिए भी होता है। भारत के कई स्थानों पर केले के पेड़ की पूजा भी की जाती है। इस प्रकार केला न केवल हमारे शरीर के लिए वरन हमारे दैनिक जीवन का भी अभिन्न अंग है।  इस प्रकार मैंने छोटे बच्चों के लिए केले पर एक कविता लिखी है ताकि वह केले की उपयोगिता के बारे में ज्यादा से ज्यादा समझ सकें और उसे अपनी कक्षा में प्रस्तुत कर सकें।  ऊपर से मैं पीला पीला,  अंदर से मैं हूँ सफेद।  चुस्ती लाये, फुर्ती लाये,  मेरा है ये गुण विशेष।  सारे फल होते गोल गोल,  पर मेरा आकार लंबा है।  जो कोई मुझको हर रोज खाता,  होता स्वास्थ्य, उसका अच्छा है।  हर पत्ता भी मेरा पूजनीय,  जो सारे पत्तों का सरताज है।  जो कोई करता इसमें भोजन,  वो करता प्रकृति का आभार है।  ऐसे अद्भुत ...