आयुर्वेद का वरदान कोरोनिल (कविता)
जब संजीवनी बूटी ने दिया था, लक्ष्मन जी को नया जीवन दान। फिर क्यों माँग रहे हो बाबा रामदेव से, कोरोनिल दवाई का तुम लोग प्रमाण। ये भी है एक जड़ीबूटियों का मिश्रण, फिर क्यों कर रहे हो इसका अपमान। प्रमाण माँगने के चक्कर में पड़कर, मरीज गवां रहे है हर दिन, अपनी जान। वैसे तो रोज डाक्टर बता रहे, काडा पियो दिन में तीन बार। इम्युनिटी बढ़ाने के नुस्खे छिपे हैं, आपकी घर की रसोई में हजार। समझ नहीं आता है मुझको, क्या सच में हम भारतवासी हैं। जो जपते रहते एकता की माला, पर दिल से कितने विरोधाभासी हैं। आज यदि कोई पहल कर रहा, इस धरा को इस संकट से बचाने में। उपहास उडाया जा रहा उस व्यक्ति का, जिसने आयुर्वेद को पहचान दिलाई, अपने योग के माध्यम से। सोचो समझो चेतना में आओ, आयुर्वेद हमारी संस्कृति है। इसके कण कण में छिपी है, अनेक रोगों से लड़ने की शक्ति है। यदि कोरोनिल सफल हो गयी तो सोचो उस वक्त क्या होगा। अमन शांति फैलेगी दुनिया में, आयुर्वेद नम...