खुशियाँ हमारी बड़ी अनोखी (कविता)

खुशियाँ हमारी बड़ी अनोखी, 
अलग अलग रूप में आतीं। 
कभी होठों पर, कभी दिलों में, 
सुख की दस्तक दे जातीं। 

जब होती खुशियों की बारिश, 
जीवन उमंग से भर जाता। 
कभी इधर तो कभी उधर, 
खूशियों से आँगन भर जाता। 

अपनों के लिए,कभी दूसरों के लिए, 
कुछ करके जो मिलती है खुशी। 
क्या बतलाऊँ उस पल दिल में, 
बिछ जाती है सुकून की लडी। 

खुशियाँ बड़ी हो या फिर छोटी, 
यह सोचने की बात नहीं। 
हर पल जीलो इन खुशियों को, 
इससे बड़ी कोई सौगात नहीं। 

       (दीप्ति सोनी) 



टिप्पणियाँ

Deepti Soni ने कहा…
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