आज जहाँ देश में हर जगह फादर्स डे मनाया जा रहा है, छोटे बच्चे हो या बड़े आज के दिन अपने पिता से बात करके बधाई दे रहे हैं, उन्हें कोई उपहार दे रहे हैं,या फिर उनके साथ बचपन से लेकर अपनी वर्तमान आयु तक की खिचवाई फोटो को फेसबुक, व्हाट्सएप, और इंस्टाग्राम पर साझा करके अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं| वहीं दूसरी ओर 12 जून को अहमदाबाद में हुई वीभत्स बिमान दुर्घटना ने पूरे संसार को गमगीन कर दिया है| उन पिताओं, माताओं को अपने बच्चों से अलग कर दिया जिन बच्चों ने और माता पिता ने एक दूसरे के साथ मिलकर कभी फादर्स डे, मदरस डे सेलिब्रेट किया होगा| आज वही बच्चे अपने पिता की, या माता पिता दोनों की एक झलक पाने से भी वचिंत हो गये, वहीं दूसरी ओर कई माता- पिता अपने बच्चों की एक झलक पाने से वंचित हो गये| ये क्षण बहुत ही वेदनापूर्ण और भावुक कर देने वाला क्षण है जिससे उबर पाना और इस वीभत्स सत्य को आत्मसात करना परिजनों के लिये इतना आसान नहीं है| रिश्तों में कभी ये फरक नहीं पड़ता कि कोई पास है या दूर, कोई किसी ऊँचे पद पर है या छोटे पद पर, कोई अमीर है या गरीब, फरक पड़ता है तो सिर्फ उसके जीवंत होने का, उसके कुशल होने क...
हम भारत के वासी हैं, ये पावन भूमि हमारी है। इसकी माँटी की खुशबू की, कुछ बात ही निराली है। उत्तर में खडा हिमालय, भारत का पहरेदार है। जड़ी-बूटियों,औषधियों का दाता, यह भारत का श्रृंगार है। इसकी छटा है निराली, जो प्राणों से भी प्यारी है। इससे निकलती नदियों की, कुछ बात ही निराली है। मंदिर, मज्जित, गिरिजाघरों से सुशोभित्, भारत ने बनायी अलग पहचान है। ये कर्म भूमि है, ये धर्म भूमि है, भारतियों का ये अभिमान है। है कण-कण भारत का पूजनीय, जिसने धर्म का मार्ग सिखलाया है। भिन्न भिन्न जीवनशैली में बंटकर भी, हमको एकता का पाठ पढ़ाया है। ऐसे अतुल्य भारत की छवि में, आओ कहीं खो जाएँ हम। महसूस करें इसकी माँटी की खुशबू, इस देश का मान बढ़ाये हम। आओ तिरंगा फहराये हम || भारत माता की जय जय हिन्द जय भारत🇮🇳 प्रेषक- दीप्ति सोनी
जीवन में माता पिता के अलावा बच्चों का एक सच्चा, पवित्र और चुम्बकीय संबंध जो होता है वह किसी और से नहीं अपने दादा - दादी व अपने नाना - नानी से होता है तथा उनके व्यक्तित्व के विकास मैं उनके दादा दादी की अहम् भूमिका होती है| Joyce Allston ने लिखा है " दादा- दादी, नायक की तरह बच्चे के विकास के लिए विटामिन के रूप में आवश्यक हैं|" दादा दादी अपने घर के वो मजबूत स्तंभ होते हैं जिनकी वजह से घर के संस्कार, मूल्य व परिवार की एकता टिकी रहती है तथा जिनकी छत्र छाया में न केवल माँ बाप बल्कि नाती पोते भी अपने आपको सुरक्षित पाते हैं। उनके उचित संस्कारों, अनुभवों और सही गलत के मायनों को सीख कर व उनका अनुसरण करते हुए एक मजबूत और सफल इंसान बन पाते हैं। या यह कह सकते हैं कि दादा- दादी उस किताब की भाँति हैं जो साल दर साल बीतने पर अपनी चमक खोती तो जाती है पर उसमें लिखी विषय सामग्री इतनी मजबूत ,प्रभावशाली और जीवंत होती है कि हर उस पड़ने वाले का मार्गदर्शन करती है जो उसे पड़ना ,सीखना व उसका अनुसरण करना चाहते हैं। दादा- दादी चाहे कितने भी बुजुर्ग और कमजोर हो जाये पर उनके अनुभव और सीख बच्चों को कठिन स...
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