जीवन के सकारात्मक पक्ष को मनुष्य कैसे देखें?
जीवन के सकारात्मक पक्ष को कैसे देखें?
मनुष्य का जीवन अनेकों उतार-चढ़ावों सेेेेेेे भरा हुआ है। जिसमें मनुष्य को सुख के साथ-साथ हताशा व कभी निराशा का भी सामना करना पड़ता है। जीवन में आने वाली यह सभी परिस्थितियां मनुष्य के जीवन में उसकी परीक्षा का प्रमाण है कि इन परिस्थितियों में वह अपना मानसिक संतुलन कैसे बनाएं रखता है, या फिर टूटकर बिखर जाता है, या फिर एक मजबूत योद्धा की तरह इन परिस्थितियों से लड़कर अपने समाज व देश के सामने एक विशिष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। यदि हम अपने जीवन के आसपास के समाज को देखें तो पाएंगे कि समाज में ऐसे कई लोग हैं। जो अपने आप में पूर्ण नहीं है। चाहे वह शारीरिक रूप से हों, मानसिक रुप से हों ,आर्थिक रुप से हो या फिर शैक्षिक रुप से हो परंतु उन्होने अपने जीवन में अपनी एक सकारात्मक सोच व कड़ी मेहनत के जरिए एक उच्च मुकाम पाया है व समाज व देश के सामने एक प्रेरणा बनकर जीवन के सकारात्मक पक्ष को कैसे देखें, इसकी राह लोगों को दिखाई है। इसका सबसे बढ़िया और सटीक उदाहरण हमारे देश के उभरते हुए प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी हैं। जिन्होंने चाय बेचने से एक प्रधानमंत्री तक का सफर कैसे तय किया है। यह जीवन के प्रति उनके सकारात्मक पक्ष को देखने का जीता जागता उदाहरण है। जीवन के इस सकारात्मक पक्ष को देखने का मोदी जी का यह सफर इस वजह से है क्योंकि वह एक कुशल कूटनीतिज्ञ व राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक धार्मिक व्यक्ति भी हैं। जो अपने हिंदू धर्म से जुड़ी आस्था को मंदिर बनवाने व कई ऐसे अनेक काम करवाने में देश को नई दिशा प्रदान करने का अथक प्रयास कर रहे हैं। जो काबिले तारीफ है, तथा यह साहस व जीवन को देखने की सकारात्मकता न केवल मोदी जी के अंदर है बल्कि हर आम जनमानस के अंदर, भगवान कृष्ण का दिया हुआ वह वरदान है। जिसे भगवान कृष्ण ने अर्जुन को महाभारत के युद्ध के दौरान गीता के उत्कृष्ट ज्ञान को देकर उसे मार्गदर्शित किया था। गीता का ज्ञान हमें सदैव यह बताता है कि जब भी विपरीत परिस्थितियां आए बिना टूटे बिना हताश हुए भगवान कृष्ण को ध्यान करके उनसे यह प्रार्थना करो कि हे प्रभु जिस तरह आपने महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथी बनकर उसे इतने बड़े युद्ध में जीत हासिल करवाई थी। उसी तरह मेरे मन को शांत व निर्मल बनाओ। ताकि मेरे अंदर सकारात्मकता का बीज प्रस्फुटित होकर साहस व पराक्रम से परिपूर्ण एक पेड़ का रूप धारण कर सके व जिसकी छांव में मेरा जीवन शांत और जीवन के प्रति मेरी सोच सदैव मेरे लिए ही नहीं अपितु दूसरों के लिए भी फलदायक बन सके।
अक्सर देखा जाता है कि मनुष्य का जीवन शिकायतों का एक पिटारा सा प्रतीत होता है। उसका सबसे बड़ा कारण है व्यर्थ की महत्वाकांक्षाएं ,अपेक्षाएं, लालच इत्यादि तथा इसी की वजह से गृह क्लेश, नकारात्मकता, अहिंसा इत्यादि का जन्म होता है जो व्यक्ति के लिए ही नहीं वरन् परिवार, समाज व देश के उत्थान के लिए अहितकर है।
अतः जो कृष्ण की भगवतगीता के उत्कृष्ट ज्ञान को समझते हैं। उनके अंदर जीवन के प्रति सकारात्मकता का भाव बहुआयामी होता है और समाज के लिए हितकर भी होता है। क्योंकि वह घटित हो रही हर परिस्थिति में कृष्ण का हाथ देखते हैं। अर्थात जो हो रहा है वह प्रभु की इच्छा से हो रहा है तथा जो आगे होगा। वह भी प्रभु की इच्छा से ही होगा। हम तो इस संसार में एक निमित्त मात्र हैं।
अतः आज की मौजूदा परिस्थितियों में इसी ज्ञान की अत्यंत आवश्यकता है। जिससे मनुष्य का जीवन सुचारु रुप से चल सके क्योंकि जीवन के प्रति सकारात्मक पक्ष को देखने का दृष्टिकोण भगवान कृष्ण द्वारा मनुष्यों को दिया हुआ वह वरदान है। जो सच में मनुष्य को जानवरों से भिन्न बनाकर एक सच्चे अर्थों में मानव बनाता है और उसके जीवन निर्वाह के चक्र को एक नया आयाम देता है।
लेखिका - दीप्ति सोनी
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