माता रानी पर कविता

माता के नौ रूप निराले,
देते सबको शक्ति अपार।
हर व्याधि हर पीड़ा हर लेती,
जो शीश झुकाए मैया के द्वार।

हम अज्ञानी तू ज्ञानी मां,
सब कुछ है तू जाने वाली।
कुछ छुपा नहीं तेरे से मां,
है सर्वजगत की तू पालन हारी।

विद्या की तुम हो देवी,
धन की लक्ष्मी तुम कहलाती।
अन्नपूर्णा बनकर तुम माता,
अपने भक्तों की तुम भूख मिटाती।

जोत तुम्हारी अजब निराली मां,
जो सुगंध से वातावरण भर देती है।
भक्तों के दुख हर लेती है मां,
तू खाली झोली भी भर देती है।

तेरी महिमा अपरंपार है मां,
सदैव करते रहे गुणगान हम।
तेरे आशीर्वाद की छत्रछाया में,
मिट जाए सब भक्तों के गम।

लेखिका - दीप्ति सोनी

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