हॉकी टीम की अविस्मरणीय जीत पर कविता



हॉकी टीम के जांबाज़ शेरों ने, 
क्या कमाल करके दिखलाया है। 
४१ साल बाद इतिहास रचकर, 
ओलंपिक में देश का गौरव बढ़ाया है। 

जश्न मन रहा देश के हर कोने में, 
ध्यानचंद की भी याद आज आई है। 
ख़ुशी के आँसु बह निकले आँखों से, 
हर कोई दे रहा तुमको आज बधाई है।

ये सच्चा जज्बा और जुनून ही था, 
जिसने इस सपने को साकार किया। 
इस जीत का आलिंगन करके तुमने, 
कांस्य पदक को अपने नाम किया। 

कांस्य पदक अब जीता तुमने, 
आगे गोल्ड पदक भी लाओगे। 
अविस्मरणीय रहे इस कड़े मुकाबले को, 
तुम कभी न भूल पाओगे। 

सलाम करता है तुम्हे पूरा भारत, 
तुमने हॉकी को नया जीवन दान दिया। 
आँखों में एक नई उमंग भरके, 
हॉकी को फिर से सही मुकाम दिया। 

प्रेषक - दीप्ति सोनी


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