मित्रता दिवस का महत्व (लेख)



प्रत्येक वर्ष हम सभी अपने मित्रों को याद करने के लिए, उनके हमारे जीवन में साथ होने के लिए व उनके प्रति अपने निश्चल प्रेम, उदारता,और अपनेपन का अहसास व्यक्त करने के लिए अगस्त महीने के प्रथम रविवार को अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस मनाते हैं तथा कार्डस,फोन और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने मित्रों को मित्रता दिवस की शुभकामनाएं भी देते हैंं। इस अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस का विचार पहली बार 20 जुलाई 1958 को डॉ रामन आर्टिंमियों ब्रेको द्वारा प्रस्तावित किया गया था। 
हर व्यक्ति के जीवन में मित्रता शब्द का एक विशेष स्थान है। मित्रता शब्द में एक ऐसी एकता का आभास होता है। जो किसी भी अच्छी और बुरी परिस्तिथि में मिटाई न जा सके और ऐसा बंधन जो जाति, धर्म, रंग- भेद, गुण- अवगुण, गरीबी- अमीरी व आयु की सीमाओं से मुक्त हो। हमारे जीवन में हर रिश्ते का अपना अलग महत्व है पर मित्रता का महत्व हर रिश्ते के ऊपर और कुछ अलग और बहुत खास है। जीवन में सच्चे और अच्छे मित्रों के बिना हम खुशहाल जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। सच मानिये हमारा जीवन किसी भी आयु के पड़ाव पर अच्छे मित्रों के बिना नीरस और अधूरा सा प्रतीत होता है। मित्रता का सबसे श्रेष्ठ उदाहरण कृष्ण- सुदामा की मित्रता से देखने को मिलता है जो अमीरी- गरीबी का भेद न करते हुए मैत्री की सच्ची और निश्चल मित्रता का प्रतीक माना जाता है। इस बात से एक बात तो निश्चित रूप से दिखाई पड़ती है कि जिंदगी में कोई सुदामा हो न हो पर कृष्ण की मित्रता अटुट है और जिसने कृष्ण से मित्रता करली और उन जैसी मित्रता निभाना सीख लिया उस पर कृष्ण की कृपा सदैव बनी रहती है। और ये ही सच्ची मित्रता का प्रतीक है। हमने अक्सर अपने जीवन में कई बार सुना या कहा भी होगा कि अपने बच्चों को, अपने भाई को, अपनी बहन को, अपने पति या अपनी पत्नी को अपना मित्र बनाओं तो जीवन जीना आसान हो जायेगा। तो क्या कभी सोचा है इस मित्र शब्द का इस्तमाल क्यों किया जाता है जबकि पहले से ही हर रिश्ते का अपना अलग नाम और सीमाएं हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है मित्रता शब्द में समाहित वो अच्छाई जो किसी व्यक्ति में या फिर उस खास रिश्ते में उसके अवगुणों, उसकी कमियों को नजरंदाज करते हुए बस एक ऐसे अपनेपन की नींव रखती है  जिसमें सिर्फ और सिर्फ विश्वास, सहयोग, प्रेम, निष्ठा और सकारात्मक सोच की निश्चल धारा सदा हिचकोले लेती रहती है तथा जिसकी वजह से हम बेझिझक अपने मन की सारी व्यथा, और सारी खुशियाँ अपने मित्र से न केवल साझा कर पाते हैं बल्कि समय पड़ने पर उनका यथासंभव सहयोग भी कर पाते हैं। हम सभी हर वर्ष अनेक दिवस मानते हैं जो हर रिश्ते के लिए आभार प्रकट करने का एक एक निश्चित दिन होता है पर मैत्री दिवस एक ऐसा दिवस है जो सभी दिवसों को अपने अंदर समाहित किये हुए है जो एक साथ न केवल अपने खास मित्रों का आभार प्रकट करने के लिये वरन उन सभी रिश्तों का आभार प्रकट करने के लिये जिसमें मित्रता की मिठास और अहसास है जिन्होंने अलग अलग रिश्तों में जीकर के भी मित्रता की सच्ची परिभाषा दुनिया के सामने प्रस्तुत की है। हमने जीवन में अक्सर कई बार बच्चों के मुख से सुना होगा कि हमारे दादा- दादी, या पापा- मम्मी उनके बेस्ट फ्रेंड हैं। 

अतः हम सभी के जीवन में मित्रों और उनकी सच्ची मित्रता की अहम भूमिका होती है और ये मित्र ही होते है जो न केवल हमारे मुख पर खुशियाँ लाते है बल्कि विपरीत परिस्तिथियों में भी हमारा उत्साह बढ़ाने से कभी पीछे नहीं हटते है तथा ऐसे मित्र और उनकी मित्रता की कद्र करना ही सही अर्थों में मैत्री दिवस मनाने को फलीभूत करता है। 

प्रेषक- दीप्ति सोनी

टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
Very good written. Thanks for knowledge

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