मदर्स डे पर कविता
जिसको भगवान ने फ़ुरसत से तराशा है।
वो और कोई नहीं, वो प्यारी माँ है मेरी,
जो रखती सदैव हमपर, अपने आँचल की छाया है।
मेरे खून का हर कतरा कतरा,
तेरा सदैव आभारी है माँ।
तू है तो , आज मैं हूँ।
वरना "मैं" का अस्तित्व कहाँ।
शादी होकर, हो गयी पराई,
मैं भी बन गयी दो बच्चों की माँ।
मेरे लाड में वो बात नहीं शायद,
जो तेरे लाड में, अब भी है माँ।
वो फिकर वो चिंता तेरी,
अब भी रहती जारी है।
बच्चों से यदि बात न करले,
तेरे मन में आ जाती उदासी है।
तेरी प्यार भरी ममता से मैंने,
जो भी अब तक पाया है।
वो ममता नहीं सिर्फ, संस्कार है तेरे,
जिनमें ढलकर, मुझे जिंदगी जीना आया है।
परवाह नहीं मुझे अन्य उपहारों की,
तू मेरे लिए बहुत खास है माँ।
तू मुझसे दूर रहे, या फिर पास में मेरे,
बस तेरा होना ,मेरे लिए काफी है माँ।
प्रेषक- दीप्ति सोनी
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