शिक्षक दिवस पर कविता



ज्ञान अधूरा गुरु बिना, 
गुरु अधूरा शिष्य बिना|
जीवन की जो राह दिखाये, 
कहलाता गुरु, परमेश्वर से बड़ा|

मार्ग में जब भी बाँधा आये, 
गुरु रहता शिष्य के समक्ष खडा|
है अद्भुत, अनोखा, पावन सा बंधन, 
जिस पर संसार का कीर्तिमान टिका|

जो अंधियारे को भी रोशन करता, 
अपनी चेतना की दिव्य अभिव्यक्ति से|
जात पात का भेद न करके, 
सींचे सबको एकता की रस्सी से|

सम्मान करो ऐसे गुरुओं का, 
जिन्होंने इस जीवन को जीना सिखाया|
आँखों में सपने पैदा करके, 
आत्मविश्वास से उड़ना सिखाया|

नमन है ऐसे गुरुओं को जो, 
अज्ञान से ज्ञान की और ले जाते हैं|
शिष्यों के सच्चे साथी बनकर, 
एक उज्ज्वल देश का निर्माण कराते हैं|

 प्रेषक - दीप्ति सोनी

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