2021 में 12वीं कक्षा की परीक्षाएं रद्द होने पर विधार्थियों की ख़ुशी पर कविता

न रात को नींद थी, 
न दिन में सुकून था। 
बस बारहवीं परीक्षा का, 
सुबह और शाम डर था। 

देखो बदल गये हालत, 
यह क्या से क्या हो गया। 
मन की मुराद पूरी हुई, 
और एग्जाम भी रद्द हो गया। 

अब न परसंटेज की टेंसन है, 
न सिर पर पढ़ाई का भार है। 
न माँ बाप की हर रोज की चिक चिक, 
अब बस ,पूरे दिन आराम ही आराम है। 

यारों, फेयरवेल नहीं हो पाई, 
इस बात का थोड़ा सा तो गम है। 
पर ये अच्छे दिन की लहर है, 
इससे बड़ा उपहार क्या कम है। 

हम उस पीढ़ी के विद्यार्थी हैं, 
जिनकी झोली में यह खुशी आयी है। 
बिना परीक्षा उत्तीर्ण किये ही, 
रिशतेदारों से ले रहे बधाई हैं। 

प्रतिभाशाली छात्रों की क्या कहें, 
कमजोर छात्र भी इस लहर में तर गये। 
जो फँसे थे मैथ्स, साइंस के फॉर्मूले में, 
सरकार के इस निर्णय से,आज वो भी अब बच गये। 

प्रेषक - दीप्ति सोनी

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