बादल की महिमा (कविता)

मैं बादल मैं बादल, 
सबसे न्यारा मैं बादल |
आसमान मैं बसता हूँ, 
धीरे-धीरे मैं चलता हूँ |

एक नहीं स्थान मेरा, 
पूरा अंबर विस्तार मेरा |
जहाँ भी चाहूँ चल देता हूँ, 
अपनी धुन में  ही रहता हूँ |
                           मैं बादल मैं बादल............ 

पानी भी बरसाता हूँ, 
जब काले रूप में आता हूँ |
उमड़ घुमड़ कर आकर मैं, 
बिजली भी चमकाता हूँ | 
                           मैं बादल मैं बादल............. 

पृथ्वी को छाया देता मैं, 
जब सूरज को ढक लेता हूँ |
मैं हूँ मस्त पवन का साथी, 
हर पल चलता रहता हूँ |
                
                        (दीप्ति सोनी) 


टिप्पणियाँ

Deepti Soni ने कहा…
Yadi Aapko meri poem pasand aaye to comment jarur kijiyega

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