नारी शक्ति की महिमा
जैसा कि नवरात्र के महत्व को हम सभी जानते हैं कि नवरात्रों में माँ जगत जननी दुर्गा की नौ रूपों में उपासना की जाती है। माँ दुर्गा उस शक्ति का नाम है जिसका जन्म ही राक्षसी ताकतों का विनाश करने के लिए तथा समस्त प्राणियों की शक्ति बनकर उनकी हर विपदाओं का निवारण करने के लिये हुआ है। ऐसी शक्ति जो इस श्रष्टि के विकास का मूल आधार है तथा जिसे संपूर्ण जगत धरती ,पृथ्वी, प्रकृति ,भूमि ,नारी ,गाय ,नदियाँ, अग्नि ,साधना ,उपासना , अन्नपूर्णा ,भोर, साँझ, रात्रि इत्यादि नामों से जानता है जिसके गर्भ में सृष्टि के विस्तार का अमूल्य खजाना छिपा हुआ है | जिसने अपनी अष्ट भुजाओं से श्रष्टि का कार्यभार सम्हाला हुआ है| जिसके अंदर करुणा ,दया ,ममता और अनेक भावनाओं का सागर समाहित है परन्तु ये शक्ति इतनी शक्तिशाली होते हुए भी आदिशक्ति कहलाती है जैसे माता पार्वती भगवान् शंकर की आदिशक्ति कहलाती हैं | तथा वह अपने स्वामी भोले नाथ की न केवल उपासना करती हैं बल्कि उनकी आज्ञा अनुसार दैत्यों का संघार भी करती हैं | हिन्दू धर्म के मुताबिक ब्रह्मा जी , भगवान् विष्णु ,और भगवान् शंकर उन्हीं की शक्तियों से सृष्टि की उत्पत्ति,पालन पोषण और संघार करते हैं | अतः जब ये शक्ति किसी भी प्राणी के पास होती है तो वह उस प्राणी की सभी समस्यांओं और कष्टों का समाधान करती है फिर चाहे ये चेतना की शक्ति हो , विचारों की शक्ति हो ,उपासना की शक्ति हो , पुरुषार्थ की शक्ति हो , धन की शक्ति हो ,मन की शक्ति हो, आत्मविश्वास की शक्ति हो या फिर अपनों के प्रेम और सौहाद्र की शक्ति हो इत्यादि | इस बात से यह स्पष्ट है कि कोई भी पुरुष अपने निमित्त कार्य को संपन्न करने के लिए शक्ति पर आश्रित होता है तथा शक्ति को भी अपनी शक्ति को प्रस्तुत करने के लिए कहीं न कहीं पुरुष के सहयोग और उसकी आज्ञा की आवश्यकता पड़ती है इसलिए शक्ति को आदिशक्ति कहा गया है |तथा इसी वाक्य में सृष्टि के संचालन का गूढ़ रहस्य छुपा हुआ है | जिसको समझना अति आवश्यक है | जैसे कि प्रकृति जिसे हम धरा भी कहते है | वह स्वयं में अनेक शक्तियों का खजाना है परन्तु यह धरती हरी- भरी मुस्कराये इसके लिए वह सूर्य की ऊर्जा पर आश्रित होती है जिसके बिना धरती की मनोहरता निस्तेज दिखाई पड़ती है | तथा नवरात्रों में हम जिस माता दुर्गा की पूजा करते है जो स्वयं एक शक्ति का प्रबल उदाहरण हैं पर उनकी सौन्दर्यता ,मुख की लालिमा उनके सुहाग के उनके साथ होने का प्रमाण है | यह साथ पति के जीवित होने का ही नहीं बल्कि हर पग पग पर पुरुष जाती का किसी भी रूप में नारी जाती को सुरक्षा उसको प्रोत्साहित करने से है ताकि वह अपनी शक्तियों को पहचान कर उनका अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए उपयोग कर सके तथा आत्म निर्भर होकर स्वयं अपनी समस्याओं का निराकरण कर सके | चाहें यह सहयोग पति का अपनी पत्नी के लिए हो ,या पिता का अपनी पुत्री के लिए हो ,या पुत्र का अपनी माता के लिए हो,या भाई का अपनी बहन के लिए हो और या फिर समाज के पुरुष वर्ग का स्त्री वर्ग के लिए आदर -सम्मान और प्रोत्साहन हो इत्यादि | आज के परिपेक्ष में इस शक्ति की बात करे तो इस शक्ति का हर स्तर पर दोहन हो रहा है चाहे प्रकृति से छेड़ छाड़ करके ,या नारीजाति के साथ बदसुलूकी करके , गौ हत्या करके , कन्या भ्रूण हत्या करके इत्यादि जिसका परिणाम आज सबके सामने है| पूरे संसार में आशांति का माहौल है हर तरफ राक्षसी ताकते फन फैलाकर डसने को तैयार हैं जो प्रकृति के सुगम संचालन में अवरोध का सबसे बड़ा कारण हैं अतः इतिहास इस बात का गवाह है कि जब जब नारी जाती का अपमान हुआ है तब तब उसे छति पहुंचाने वाले और उस छति में उसका सहयोग करने वालों का सदा विनाश ही हुआ है चाहे वो कितना भी पराक्रमी और बलशाली क्यों न हो | जैसे द्रौपदी का भरी सभा में कौरवों द्वारा अपमान किये जाने पर समस्त कौरव राज्य का विनाश हो गया था तथा रावण द्वारा सीता के अपरहण किये जाने पर रावण व् उसके समस्त बेटों का विनाश हो गया था |
अतः नवरात्र का मतलब सिर्फ देवी की मूर्ति पूजा ही नहीं उस नारी शक्ति की पूजा, सुरक्षा और सम्मान से है जिससे इस सृष्टि का विस्तार है इस प्रकार नवरात्र का उत्सव तभी फलीभूत होगा जब हम सब इस नारी शक्ति की महत्वता को समझकर उसे वो आदर सम्मान दें और हर क्षेत्र में प्रोत्साहित करें जिसकी वो असल में हकदार है तथा हर परिवार को चाहिए कि वो अपनी बेटियों के साथ साथ अपने बेटों को भी नारी का सम्मान करना व् उचित और अनुचित का पाठ पढायें तथा अपने इतिहास और धर्म का सहारा लेकर इसके अनुचित परिणामों से भी उनकों शिक्षित करें| यदि ऐसा कर पाने में हम सफल होते है तो सच मानिये भारत ही सही मायने में अपने आपको विश्वगुरु कहलाने में गौरान्वित महसूस करेगा |
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