बच्चों के जीवन में दादा दादी/नाना नानी का महत्व



जीवन में माता पिता के अलावा बच्चों का एक सच्चा, पवित्र और चुम्बकीय संबंध जो होता है वह किसी और से नहीं अपने दादा - दादी व अपने नाना - नानी से होता है तथा उनके व्यक्तित्व के विकास मैं उनके दादा दादी की अहम् भूमिका होती है|

Joyce Allston ने लिखा है " दादा- दादी, नायक की तरह बच्चे के विकास के लिए विटामिन के रूप में आवश्यक हैं|"

दादा दादी अपने घर के वो मजबूत स्तंभ होते हैं जिनकी वजह से घर के संस्कार, मूल्य व परिवार की एकता टिकी रहती है तथा जिनकी छत्र छाया में न केवल माँ बाप बल्कि नाती पोते भी अपने आपको सुरक्षित पाते हैं। उनके उचित संस्कारों, अनुभवों और सही गलत के मायनों को सीख कर व उनका अनुसरण करते हुए एक मजबूत और सफल इंसान बन पाते हैं। या यह कह सकते हैं कि दादा- दादी उस किताब की भाँति हैं जो साल दर साल बीतने पर अपनी चमक खोती तो जाती है पर उसमें लिखी विषय सामग्री इतनी मजबूत ,प्रभावशाली और जीवंत होती है कि हर उस पड़ने वाले का मार्गदर्शन करती है जो उसे पड़ना ,सीखना व उसका अनुसरण करना चाहते हैं। 
दादा- दादी चाहे कितने भी बुजुर्ग और कमजोर हो जाये पर उनके अनुभव और सीख बच्चों को कठिन से कठिन परिस्तिथियों से सामना करने की ताकत भी देते हैं। तभी घर के नाती- नातनियाँ अपने दादा दादी के बहुत करीब होते हैं। दादा दादी बच्चों के सच्चे दोस्त भी होते हैं, बच्चे उनसे नयी - नयी कहानियाँ सुनना, उनके साथ घूमने जाना, उनके साथ वक़्त बिताना व जैसा वे करते हैं उसकी नकल करना बच्चों को काफी पसंद होता है। वक़्त के साथ साथ बहुत कुछ बदला है जिसकी वजह से संयुक्त परिवार एकांकी परिवार के रूप में विभक्त होते जा रहे हैं। जिससे नाती पोते अपने दादा दादी के साथ अपना बचपन व्यतीत नहीं कर पाते हैं जिससे बच्चों को जो संस्कार अपने दादा दादी से मिलने चाहिये थे वो उससे वंचित हो जाते हैं पर जब भी उन्हें अपने दादा दादी के साथ समय बिताने का मौका मिलता है तब वे इस पल को गवाना नहीं चाहते क्योंकि दादा - दादी बच्चों के सुपर हीरो जो होते हैं। जिनकी गोद में खेलकर, कहानियाँ सुनकर वो बड़े हुए हैं इसलिए बच्चों का अपने दादा - दादी से एक चुम्बकीय प्रेम होता है जो स्वतः ही बच्चों को अपने दादा  दादी को अपनी ओर खींचता है,  अनगिनत प्रश्नों का जबाब भी उन्हें अपने दादा दादी से ही मिलता है। आज की इंटरनेट की दुनियाँ में दादा दादी और बच्चों के बीच संचार प्रक्रिया थोड़ी कम हो गयी है, जिससे दादा- दादी अपने आपको एकांकी महसूस करते हैं तथा आज की पीढ़ी को भी चाहिए कि वो अपने व्यस्त दिनचर्या में से थोड़ा वक़्त अपने दादा- दादी के लिए भी निकाले ,उनसे ढेर सारी बातें करें, उनकी परेशानियों को सुने और  यदि समर्थ हैं तब उनको दूर करने की कोशिश भी करें। उनको एहसास दिलायें कि उनकी उपस्तिथि और उनका आशीर्वाद कितना हमारे लिए कीमती है। अपने दादा- दादी के किस्से, कहानियों व उनकी रुचियों को वीडियो व यूट्यूब के माध्यम से अपने ग्रुप व फेसबुक पर शेयर करें ताकि उनके तजुर्बों और कुशलताओं का दूसरे लोग भी फायदा उठा सकें। उनको हर पल एहसास दिलाए की इस बढ़ती हुई उम्र में हम हमेशा आपके साथ हैं एक सच्चे दोस्त की तरह। 
आज ग्रांड पैरेंट्स डे पर मुझे भी अपने दादा दादी की याद आ गयी जो इस वक्त हमारे बीच मौजूद नहीं हैं कुछ पंक्तियाँ उनकी याद में इस प्रकार हैं---

एक प्यारा सा किस्सा थे, 
दादा दादी मेरे जीवन का हिस्सा थे। 
वो पल आज भी याद हैं, 
जब वो हमारे साथ थे। 
वो किस्से कहानियों का अंबार थे, 
मेरे दादा दादी मेरे लिये बहुत खास थे। 
वो सच्चे दोस्त थे हमारे, 
जिनसे हम ढेर सारी बातें बतियाते थे। 
कभी उनको हँसाते, तो कभी डर के भाग जाते थे, 
कभी उनकी अंगुली पकड़कर चले, 
कभी उनको अपने कंधों का सहारा दिया। 
एक आदेश पर खड़े होकर, 
छट से उनका सारा काम किया। 
उनके लड़खड़ाते पैरों ने हमें, 
तेजी से दौड़ना सिखाया। 
जीवन जीने का आत्मविश्वास, 
हमारे तन मन में जगाया। 
कपकपाती अंगुलियाँ उठी उनकी, 
सिर पर हमेशा आशीर्वाद के लिए, 
वो आशीर्वाद न थी, वो ताकत थी, 
हमारे सर्वगुंण विकास के लिये। 
बड़ा सुंदर गाते थे जब, 
वो अपनी लय और तान में। 
जी करता था, सीधा प्रसारण 
करदूँ मैं ,पूरे हिंदुस्तान में। 
वो लम्हें आज भी 
दिल को, छू जाते हैं। 
मेरे दादा दादी आप मुझे, 
बहुत याद आते हैं। 

 लेखिका - दीप्ति सोनी


टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
Beautiful lines... Keep writing....❤️❤️❤️

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