प्यारी बेटियाँ (कविता)
माँ बाप की प्यारी होतीं हैं बेटियाँ,
सुख का सागर होती हैं बेटियाँ |
घर के आँगन को महकाने वाली,
घर की फुलवारी होतीं हैं बेटियाँ।
बिन बेटियों के सब त्यौहार भी सूने,
सूने पड़ जाते सावन के भी झूले।
घर के हर रस्म रिवाज़ों में भी,
बिन बेटियों के सब सगुन भी सूने।
ऐसी प्यारी बेटियाँ सिर्फ,
किस्मत वालों को ही मिलती हैं।
झोली भरती उनकी खुशी से,
जब वो उनके घर में पैदा होतीं हैं।
आओ हम सब मिलकर के,
कसम खायें एक साथ।
बेटियों का अस्तित्व बचाना ही,
अपना हो पहला अधिकार।
(दीप्ति सोनी)
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