चमकीले तारे (कविता)
रात्रि का श्रृंगार हूँ मैं,
जब आसमान में चमकता हूँ |
टिम टिम टिम टिम करता रहता,
सबका मन मोह लेता हूँ |
अनगिनत असंख्य मेरी सीमा,
अनगिनत नामों से सजा हुआ |
ब्रमांड मैं है मेरा अस्तित्व,
लड़ियों सा मैं वहाँ बिखरा हुआ |
चंदा का सैनिक बनकर जब मैं,
रात्रि में चहुंओर बिखर जाता हूँ |
फैलाकर अपनी सफेद चाँदनी,
रात्रि को रोशन कर जाता हूँ |
(दीप्ति सोनी)
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