कोरोना की शादी (कविता)
कोरोना तेरे लिए पतंजलि वालों ने,
एक लड़की ढूँढ निकाली है।
कोरोनिल है उसका नाम,
जिससे तेरी शादी होने वाली है।
रामदेव हैं पिता उसके,
प्रकृति उसकी माता है।
अब क्या होगा तेरा कोरोना,
तू इस बंधन में बंधने वाला है।
आवारा बनकर घूमा है तू,
इस पूरी दुनिया में अब तक।
अपने राक्षसी स्वभाव के कारण,
तूने क्षति पहुँचाई है हर पल।
पूरी दुनिया ढूँढ रही जिसे,
वो बैठी थी भारत में छिपकर।
अब जाकर कहीं बाहर आयी,
अपने पिता जी के कहने पर।
कुछ सीख ले तू,
भारत के संस्कारों से।
एक बेटी दे रहा योगी बाप,
तुझे अपने हाथों से।
ये शुभ घड़ी देश में,
आज फिर आई है।
कोरोना वाइरस तुझे,
अनेक-अनेक भधाई है।
इस बंधन में बंधके तू,
यहाँ से जल्दी से निकल ले।
बहुत विचरण कर लिया तूने दुनिया का,
अपने घर में जाकर आराम तू करले।
प्रेषक- दीप्ति सोनी
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