आलसपन बड़ा दु:खदाई (कविता)

आलसपन है बड़ा दु:खदायी, 
छोड़ो इसको मेरे भाई। 
करने देता नहीं कोई काम, 
इसके रहते सब बिगड़े काम। 

न ही इसका कोई ठौर ठिकाना, 
बस पूरे दिन आराम फरमाना। 
बुद्धि को ये है हर लेता, 
आगे नहीं ये भड़ने देता। 

आलस है, निष्क्रियता का सूचक, 
है सूचक, असफलता का भी । 
जो कोई इसकी शरण में जाता, 
वो खोता सब कुछ अपना ही। 

आओ हम सब प्रण करें, 
आलस कभी करेगें नहीँ। 
दिमाग को सक्रिय बनाकर ही, 
काटेगें आलसपन की नींव। 
            

 (दीप्ति सोनी) 


टिप्पणियाँ

Deepti Soni ने कहा…
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