प्रकृति का उपहार बारिश (कविता)

⛈️🌧️⚡💧💦☔
बूंद बूंद होती बारिश भी, 
प्रकृती का एक अनुपम उपहार है। 
गर्मी मारे, शीतलता बरसाये, 
मौसम बदलने का आगाज़ है। 

मैं भी शांत कमल सी बैठी, 
जब अपने घर के आंगन में। 
बरबस अद्भुत हुआ हो जैसे, 
बिजली चमकी हो बादल में। 

घोर अंधकार छाया अंबर में, 
जोरों सी गड़गडाहट हुई। 
बूँदे टपकी, बारिश आई, 
धरा भी मुस्कराने लगी।

नई स्फुर्ति से खिल गया यह तन, 
जब बैठी मैं खिड़की के सिरहाने पर।     
माटी की सोंधी खुशबू से, 
अभिभूत हो गया मेरा अंतर्मन। 

प्रकृति का ये अनुपम उपहार, 
सबके मन को भाता है। 
धरती की यह प्यास बुझा कर, 
सबको नवजीवन दे जाता है। 

         (दीप्ति सोनी) 




टिप्पणियाँ

Deepti Soni ने कहा…
यदि आपको मेरी यह कविता पसंद आये तो कॉमेंट कीजियेगा।
Rekha verma ने कहा…
Ye mosam h suhana bahar na jana 😄
Unknown ने कहा…
Very good 👍 & nice

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